ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य समस्याएँ उत्पन्न करना नहीं, बल्कि उनका न्यायसंगत, विवेकपूर्ण और मानवीय समाधान प्रस्तुत करना है।
यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के सिद्धांतों का समय पर पालन किया गया होता, तो न केवल गर्भस्थ शिशु के जीवन की रक्षा की संभावना बढ़ सकती थी, बल्कि किसी नियम के उल्लंघन की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होती।






































































