सुप्रीम कोर्ट से CBSE की तीन-भाषा नीति को राहत नहीं
कक्षा 9 में नई भाषा व्यवस्था से छात्रों और अभिभावकों में चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति के खिलाफ दायर याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में फिलहाल कोई अस्थायी आदेश नहीं दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने याचिका को पहले से लंबित अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। याचिका एक गैर-सरकारी संगठन ने दायर की है, जिसने नीति के बजाय इसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
CBSE की नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों पर लागू होगी। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। विदेशी भाषा को केवल तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुसार किया जा रहा है। CBSE ने यह भी साफ किया है कि तीसरी भाषा के लिए कक्षा 10 में बोर्ड परीक्षा नहीं होगी और उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
इस नीति को लेकर कई अभिभावकों और छात्रों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि जो छात्र पहले से जर्मन, फ्रेंच या जापानी जैसी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें अचानक नई भारतीय भाषा अपनानी पड़ सकती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस बदलाव के लिए छात्रों और स्कूलों को पर्याप्त समय नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार, CBSE और NCERT से इस मामले में जवाब मांग चुका है। अब सभी पक्षों की दलीलें जुलाई में होने वाली सुनवाई में सुनी जाएंगी।
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