"अभी नहीं तो कभी नहीं...", आखिर कौन हैं झारखंड के सोनम वांगचुक 2.0, जिनकी एक भूख हड़ताल ने सरकार की बढ़ा दी है बेचैनी?
छह दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो आज झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बन चुके हैं। आखिर कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो, कैसे एक साधारण प्रतियोगी छात्र हजारों युवाओं की आवाज बना.


छह दिन से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया। बारिश आई, बिजली कड़की, लेकिन उनका इरादा एक पल के लिए भी नहीं बदला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्रों के बीच, एक शख्स लगातार भूख हड़ताल पर बैठा है। नाम है देवेंद्र नाथ महतो।कभी एक साधारण प्रतियोगी छात्र रहे देवेंद्र, आज झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में हो रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। तो आखिर ये देवेंद्र नाथ महतो हैं कौन, और कैसे एक छात्र नेता पूरे राज्य के युवाओं की आवाज बन गए? आइए, जानते हैं...
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो अब इस आंदोलन के प्रतीक बन गए हैं। जैसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा और परीक्षा सुधार की मांग के लिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था, ठीक उसी तरह झारखंड में देवेंद्र नाथ महतो का आंदोलन भी अब राज्य की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है।
'अभी नहीं तो कभी नहीं'... इसी नारे के साथ शुरू हुई भूख हड़ताल
देवेंद्र नाथ महतो का कहना है कि उनका आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि 5 जुलाई को 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद छात्रों में असंतोष बढ़ता गया, खासकर जब उन्होंने कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया। "अभी नहीं तो कभी नहीं। अगर इस बार हम नहीं लड़े, तो आने वाली पीढ़ियों को भी इसी व्यवस्था का सामना करना पड़ेगा।" देवेंद्र की मुख्य मांग है कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में जो अनियमितताएँ हैं, उनकी निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, और भर्ती एजेंसियों में व्यापक सुधार किया जाए।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? मां को खोया, लेकिन आंदोलन नहीं छोड़ा
रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव से आने वाले देवेंद्र नाथ महतो का सफर किसी सामान्य प्रतियोगी छात्र की तरह ही रहा है। उन्होंने 2006 में मैट्रिक और 2008 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक की डिग्री हासिल की, फिर बीएड किया, और संस्कृत में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके साथ ही, कुरमाली, जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा में भी उन्होंने दूसरा स्नातकोत्तर प्रथम श्रेणी से पूरा किया। लेकिन उनकी पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही।
2015 से, वे छात्रवृत्ति, पेपर लीक, नियोजन नीति, परीक्षा नियमावली और JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर लगातार छात्रों की आवाज उठाते रहे हैं। यहां तक कि 6वीं JPSC परीक्षा से जुड़े आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी मां को भी खो दिया, लेकिन छात्र आंदोलन से पीछे नहीं हटे।
जंतर-मंतर जैसी गूंज, आंदोलन को मिला राष्ट्रीय समर्थन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन की चर्चा अब दिल्ली के जंतर-मंतर से होने लगी है। हजारों छात्र राष्ट्रीय ध्वज के साथ धरने पर बैठे हैं। बारिश, बिजली और खराब मौसम की परवाह किए बिना उनका आंदोलन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "झारखंड के आसमान में मानसून के बादल हैं, लेकिन छात्रों के भविष्य पर भ्रष्टाचार के काले बादल छाए हुए हैं। हम तब तक नहीं हटेंगे, जब तक ये बादल नहीं छंटते।" प्रदर्शनकारियों का नारा भी काफी चर्चा में है- "अब हम जाग रहे हैं, ताकि सरकार जागे।"
इस आंदोलन को Cockroach Janata Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का भी समर्थन मिला है। उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। इसके अलावा, उन्होंने सोशल मीडिया पर भी यह लिखा कि उनकी पार्टी झारखंड के छात्रों के साथ खड़ी है।

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