तीन दिन बाद खत्म हुआ CUJ का महा-धरना, भूख हड़ताल खत्म, हॉस्टल मेस चार्ज और ईयर बैक विवाद पर बनी सहमति
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में तीन दिन बाद छात्रों का धरना और भूख हड़ताल खत्म हो गई। मेस शुल्क, भोजन की गुणवत्ता और ईयर बैक विवाद पर प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ) के चेरी-मनातू कैंपस में पिछले तीन दिनों से लगातार चल रहा छात्रों का धरना और भूख हड़ताल मंगलवार को आखिरकार समाप्त हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनरत छात्रों के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों पक्षों में सहमति बन गई। छात्रों की मुख्य मांगों में हॉस्टल मेस की लगातार बढ़ रही फीस का समायोजन, खाने की गुणवत्ता में ठोस सुधार और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में शामिल रहे छात्रों पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करना शामिल था।
रजिस्ट्रार ने जारी किया आधिकारिक पत्र, दिया लिखित आश्वासन
धरना समाप्त कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच लंबी वार्ता चली। इसके बाद 25 अगस्त 2026 को प्रभारी कुलसचिव (रजिस्ट्रार इंचार्ज) की ओर से विधिवत पत्र जारी किया गया। पत्र में स्पष्ट किया गया कि हॉस्टल सीट रेंट को मेस चार्ज के साथ समायोजित करने से संबंधित मांग को यूनिवर्सिटी की फीस रिव्यू कमेटी और फाइनेंस कमेटी के समक्ष विचार व अंतिम अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने यह लिखित भरोसा भी दिया कि मुख्य गेट बाधित करने या आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक (punitive) कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, विश्वविद्यालय ने छात्रों को भविष्य में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में बाधा न डालने की नसीहत भी दी है।
2621 रुपये से 3800 तक पहुंची मेस फीस, छात्रों ने मांगा हिसाब
धरने के दौरान छात्रों ने मेस शुल्क में बेतहाशा वृद्धि पर गंभीर सवाल खड़े किए। छात्रों का कहना था कि पहले हॉस्टल मेस का शुल्क लगभग 2,621 रुपये प्रतिमाह था, जिसमें शाम का नाश्ता भी शामिल रहता था। बाद में इसे बढ़ाकर यूजी हॉस्टल के लिए करीब 3,071 रुपये और पीजी/पीएचडी हॉस्टल के लिए 3,377 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। अब इसे बढ़ाकर लगभग 3,800 रुपये करने की बात सामने आई है। छात्रों ने आरोप लगाया कि पैसे लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन खाने की क्वालिटी बेहद खराब है। छात्रों ने मेस फीस बढ़ाने का आधार, भोजन की वास्तविक लागत और आउटसोर्स मेस एजेंसी को किए जाने वाले भुगतान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
ईयर बैक और अटेंडेंस के विवाद पर भी गरमाया था माहौल
मेस के मुद्दे के अलावा कैंपस में ईयर बैक (Year Back) और परीक्षा से रोके जाने का मामला भी काफी गरमाया हुआ था। पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड गणित पाठ्यक्रम के कुछ छात्रों ने कम उपस्थिति (शॉर्ट अटेंडेंस) का हवाला देकर परीक्षा में बैठने से रोके जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। छात्रों का दावा था कि गंभीर बीमारी के कारण कक्षाएं छूटी थीं और इसके पुख्ता मेडिकल दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया। इसी वजह से छात्रों को भूख हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा था, जिसे प्रशासन के सकारात्मक रुख के बाद अब समाप्त कर दिया गया है।
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