Sonam Wangchuk News: 170 दिन बाद जेल से रिहा होंगे सोनम वांगचुक, केंद्र सरकार ने रद्द की हिरासत
केंद्र ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द कर दी है. जिनको 170 दिन से लगातार जोधपुर की जेल में रखा गया था.

Sonam Wangchuk News: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द कर दी है. कहा है कि यह निर्णय लद्दाख में शांति बहाल करने और संवाद के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है.
सरकार ने एक बयान में कहा कि 24 सितंबर, 2025 को लेह में उत्पन्न हुई गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था. क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लेह के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा हिरासत आदेश जारी किया गया था.
सरकार ने बताया कि वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा बल (एनएसए) के तहत निर्धारित अधिकतम निवारक हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय पहले ही बिता चुका है.
वांगचुक की पत्नी ने दी हिरासत को चुनौती
पिछले अक्टूबर से ही सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है , जिसमें उनकी हिरासत को चुनौती दी गई है. हिरासत के बाद उन्हें जोधपुर केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था.
कपिल सिब्बल का सोनम वांगचुक को साथ
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल, जो आंगमो के वकील थे, ने अन्य बातों के अलावा इस आधार पर उनकी हिरासत को चुनौती दी थी कि हिरासत का आधार बनने वाली सभी प्रासंगिक सामग्री उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई थी. इस बात पर विवाद था कि क्या भाषणों के वीडियो, जिन्हें प्रशासन ने भड़काऊ बताया था, वांगचुक को दिए गए थे. प्रशासन का दावा था कि उन्होंने वांगचुक को वीडियो वाली एक पेनड्राइव दी थी, जबकि अदालत ने पूछा कि क्या उन्हें वास्तव में उन्हें देखने का अवसर मिला था.
वांगचुक के भाषणों का निकाला गया निरर्थक अर्थ !
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि प्रशासन वांगचुक के भाषणों का अत्यधिक अर्थ निकाल रहा है. पीठ ने भाषणों के अनुवाद में कुछ विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया.
क्या है लद्दाख वासियों की मांग.. और क्यों लिया गया था वांगचुक को हिरासत में?
राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर लद्दाख में हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हो गए. इसके दो दिन बाद से वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में रखा गया है.
मंत्रालय ने आगे कहा, "सरकार लद्दाख में विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है ताकि क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं का समाधान किया जा सके."
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि "बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय स्वभाव के लिए हानिकारक है और इसने छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यवसायों, पर्यटन संचालकों और पर्यटकों सहित समुदाय के विभिन्न वर्गों और समग्र अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है."
मंत्रालय ने लिखा, "सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद स्थापित किया जा सकें. इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है."
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