मुनाफे में गिरावट पड़ी भारी, BHEL-SAIL से छिन सकता है महारत्न दर्जा
तीन साल से मुनाफे का तय लक्ष्य पूरा नहीं कर सकीं दोनों कंपनियां, सरकार ने सुधार के लिए दिया एक साल का समय।


देश की दो बड़ी सरकारी कंपनियां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) अपने प्रतिष्ठित ‘महारत्न’ दर्जे को बचाने की चुनौती का सामना कर रही हैं। केंद्र सरकार ने दोनों कंपनियों को वित्तीय प्रदर्शन सुधारने के लिए एक साल का समय दिया है। तय मानकों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में इनका दर्जा घटाकर ‘नवरत्न’ किया जा सकता है।
सरकारी समीक्षा में पाया गया कि BHEL और SAIL पिछले तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ (PAT) की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सकीं। यही वजह है कि दोनों कंपनियों को चेतावनी दी गई है। बताया जा रहा है कि देश की 14 महारत्न कंपनियों में केवल यही दो कंपनियां हैं जो इस महत्वपूर्ण मानक को पूरा नहीं कर पाईं।
महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए कंपनी का औसत वार्षिक टर्नओवर 25,000 करोड़ रुपये से अधिक, कुल संपत्ति 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा और मजबूत वैश्विक कारोबार होना भी जरूरी है। हालांकि BHEL और SAIL अन्य कई शर्तों पर खरी उतरती हैं, लेकिन मुनाफे का लक्ष्य पूरा न होने से उनकी स्थिति कमजोर हुई है।
अगर दोनों कंपनियों का दर्जा घटता है तो उनके कामकाज पर भी असर पड़ेगा। महारत्न कंपनियां सरकार की मंजूरी के बिना 5,000 करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकती हैं, जबकि नवरत्न कंपनियों के लिए यह सीमा केवल 1,000 करोड़ रुपये है। इससे बड़े निवेश और विस्तार योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय को कंपनियों के लिए सुधार योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। नीति आयोग ने BHEL की मानव संसाधन नीतियों में बदलाव की जरूरत बताई है, जबकि SAIL के मुनाफे पर स्टील कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर माना गया है।
अब अगले एक साल में दोनों कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। इसके बाद होने वाली समीक्षा तय करेगी कि उनका महारत्न दर्जा बरकरार रहेगा या नहीं।

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