सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में बदलाव, जस्टिस P. S. Narasimha ने ली जस्टिस माहेश्वरी की जगह
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में बदलाव, P. S. Narasimha ने ली जस्टिस माहेश्वरी की जगह

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस P. S. Narasimha अब देश की सर्वोच्च न्यायिक नियुक्ति संस्था, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम, के सदस्य बन गए हैं। यह बदलाव जस्टिस जे. के. माहेश्वरी के 28 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद लागू हुआ। वरिष्ठता के नियम के अनुसार जस्टिस नरसिम्हा ने कॉलेजियम में पांचवें सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली है। भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से लिए जाते हैं। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ सर्वोच्च न्यायालय के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं। वर्तमान में इस समिति का नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कर रहे हैं।
जस्टिस P. S. Narasimha के कॉलेजियम में शामिल होने से अब न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरण से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी भी अहम भूमिका रहेगी। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता बनाए रखने में कॉलेजियम की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यही संस्था उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के चयन संबंधी सिफारिशें करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जस्टिस नरसिम्हा मई 2028 तक कॉलेजियम के सदस्य बने रहेंगे। इस अवधि के दौरान वे न्यायिक प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में भाग लेंगे। उनके अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए माना जा रहा है कि कॉलेजियम के कामकाज में उनका योगदान न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने में सहायक होगा।
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