Telegram बैन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची कंपनी, सुनवाई शुरू
केंद्र और Telegram आमने-सामने, Telegram ने 15 करोड़ यूज़र्स के प्रभावित होने का दावा किया

NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी बैन को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। Telegram ने केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि इससे भारत में उसके 15 करोड़ से अधिक यूजर्स प्रभावित हुए हैं। वहीं केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि यह कदम छात्रों को फर्जी पेपर लीक गिरोहों से बचाने के लिए उठाया गया है। अदालत ने फिलहाल Telegram को कोई राहत नहीं दी है और केंद्र से जवाब मांगा है।
केंद्र सरकार ने 16 जून से 22 जून तक Telegram पर अस्थायी बैन लगाया है। सरकार का कहना है कि NEET-UG की 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा से पहले कई Telegram चैनल फर्जी प्रश्नपत्र बेचने और छात्रों से पैसे वसूलने में लगे थे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार कुछ चैनल ₹14,000 से लेकर ₹10 लाख तक की मांग कर रहे थे। एजेंसी ने करीब 200 संदिग्ध चैनलों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कराया है। सरकार ने Google और Apple को भी Telegram को अस्थायी रूप से स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि Telegram के Message Edit Feature का गलत इस्तेमाल हो रहा था। इसके जरिए पुराने संदेशों को बदलकर फर्जी पेपर लीक के सबूत तैयार किए जा रहे थे। इसी वजह से भारत में इस फीचर को 30 जून तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। दूसरी ओर, Telegram के संस्थापक Pavel Durov ने कहा कि प्रतिबंध से आम यूज़र्स परेशान हो रहे हैं और समस्या दूसरे प्लेटफॉर्म पर चली गई है। मामला अब अदालत की अगली सुनवाई में आगे बढ़ेगा।
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