बिना फायर NOC के चल रहे अस्पतालों पर कार्रवाई के निर्देश, सिविल सर्जन ने अपनायी ज़ीरो टॉलरेंस नीति
अग्नि सुरक्षा के तहत 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाते हुए प्रत्येक भवन और तल पर कार्यशील अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। रांची सिविल सर्जन ने अग्निशामक यंत्र दुरुस्त करने के दिए निर्देश।

राजधानी राँची के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CS) ने भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए सख्त सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य में वर्तमान में पड़ रही अत्यधिक गर्मी के कारण अस्पतालों के विद्युत तंत्र पर दबाव बढ़ने, शॉर्ट सर्किट होने और हीट स्ट्रोक जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए अग्नि सुरक्षा, विद्युत प्रबंधन और आपदा तैयारी के मानकों का पालन बिना किसी अपवाद के करना अनिवार्य होगा।
अग्नि सुरक्षा के तहत 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाते हुए प्रत्येक भवन और तल पर कार्यशील अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। सभी संस्थानों के लिए फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखना और मासिक फायर मॉक ड्रिल कर उसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि वैध फायर एनओसी (NOC) के बिना अस्पताल संचालन की अनुमति निरस्त की जा सकती है।
भीषण गर्मी के प्रबंधन के लिए सभी वार्डों, आईसीयू और ओपीडी में कूलिंग सिस्टम जैसे एसी, कूलर और पंखे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में विशेष 'हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट कॉर्नर' बनाए जाएंगे, जहाँ ओआरएस, आईवी फ्लुइड्स और ठंडे पानी की 24x7 व्यवस्था होगी। साथ ही, एम्बुलेंसों में भी आपातकालीन हीट मैनेजमेंट की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
विद्युत सुरक्षा के संबंध में सभी उपकरणों और वायरिंग के तत्काल निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और आईसीयू व ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए समर्पित पावर लाइन सुनिश्चित की जाएगी। ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य ज्वलनशील पदार्थों को सीधी धूप से दूर सुरक्षित क्षेत्रों में रखने का निर्देश दिया गया है।
प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान को एक सुरक्षा नोडल अधिकारी नामित करना होगा और 72 घंटे के भीतर अनुपालन रिपोर्ट कार्यालय को सौंपनी होगी। जिला स्तरीय टीम द्वारा किसी भी समय आकस्मिक निरीक्षण किया जा सकता है। निर्देशों की अवहेलना या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अस्पताल या अधिकारी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश ज्योति शर्मा द्वारा जनहित में उठाई गई मांग और राज्य की वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में जारी किए गए हैं।
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