BJP ने किया दरकिनार.. बाहुबली का पलटवार, कौन हैं नवनिर्वाचित मेयर 'Sanjeev Singh'!
धनबाद निकाय चुनाव के परिणाम के बाद संजीव सिंह का नाम बेजोड़ चर्चा में बना हुआ है. पूर्व विधायक संजीव सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए मेयर की गद्दी हासिल की है. आइए जानते हैं क्या है 'बागी' संजीव सिंह की कहानी.

Dhanbad Mayor Sanjeev Singh: संजीव सिंह की इस धमाकेदार जीत का सफर शुरू होता है भाजपा द्वारा दरकिनार किए जाने की घटना के साथ. झारखंड में जब नगर निकाय चुनाव कराए जाने की आधिकारिक घोषणा की गई, तब प्रत्येक दलों ने अपने-अपने पसंदीदा नेता पर अपना समर्थन जाहिर किया. बारी जब संजीव सिंह को चुनने की आई, तो भाजपा द्वारा बजाय संवीव सिंह को चुनने के विश्वास संजीव कुमार पर जताया. वहीं अब परिणाम भी घोषित हो चुके हैं और बीजेपी समर्थित संजीव कुमार को नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने चौथे स्थान पर धकेल दिया है.
चचेरे भाई की हत्या का आरोप और जेल की यात्रा
संजीव सिंह का राजनीतिक जीवन साल 2017 में विवादित मोड़ पर आ खड़ा हुआ. उन्हें जेल भी जाना पड़ा. मामला था चचेरे भाई नीरज सिंह की मौत का. 21 मार्च 2017 को नीरज की AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया. जिसके बाद भाई की मौत का आरोप संजीव सिंह पर लगाया जाने लगा. इसी आरोप के आधार पर उन्हें अप्रैल 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया. कानूनी कार्रवाईयों के बाद संजीव सिंह को 8 साल जेल में बिताने पड़े.
अब 2017 से 8 वर्ष बीत जाने के बाद 2025 आ चुका था. धनबाद की ही एक विशेष अदालत द्वारा साक्ष्यों के अभाव में संजीव सिंह के साथ अन्य 11 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया. यह समय था अगस्त 2025 का.
चुनावी रंजिश, भाजपा की बेदखली
संजीव और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि 2026 के नगर निकाय चुनाव में उन्हें मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया जाएगा. लेकिन भाजपा ने भरोसा संजीव सिंह के बजाय संजीव कुमार पर जताया. इस दरकिनारी के बाद संजीव सिंह ने चुनाव निर्दलीय तौर पर लड़ने का फैसला लिया.
ऐतिहासिक जीत, दबदबा बरकरार
संजीव सिंह का निर्दलीय चुनाव लड़ना पूरी तरह से सही साबित हुआ. उन्होंने 114362 वोट हासिल किए. अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और जेएमएम समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल को बुरी तरह हराया. अग्रवाल कुल 82460 मत ही हासिल कर सके. वहीं अपने पूर्व पार्टी भाजपा के समर्थित उम्मीदवार संजीव कुमार को भी उन्होंने बहुत पीछे छोड़ दिया. जिन्हें केवल 57895 वोट ही प्राप्त हुए.
'सिंह मेंशन' की दास्तान
धनबाद का 'सिंह मेंशन' केवल एक आलीशान बंगला नहीं, बल्कि दशकों तक अविभाजित बिहार और वर्तमान झारखंड के कोयलांचल की सत्ता का केंद्र रहा है. इसकी कहानी उत्तर प्रदेश के बलिया से आए एक युवक के 'कोयला किंग' बनने, ट्रेड यूनियन पर वर्चस्व और फिर परिवार के खूनी संघर्ष में बंटने की है.
संजीव सिंह धनबाद के कद्दावर नेता सूर्यदेव सिंह के छोटे बेटे हैं. जिनकी ख्याति कोयला माफिया के तौर पर प्रचलित है. उनकी माता कुंती सिंह भी धनबाद से विधायक रह चुकी हैं. राजनीति में रमे इस परिवार की छोटी बहू यानी संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह भी झरिया से वर्तमान में भाजपा नेता और विधायक हैं.
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