15 वकीलों को नोटिस के बाद मचा था बवाल, अब रांची बार एसोसिएशन ने बदला आंदोलन का तरीका, जानें नया फैसला
रांची के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) सदर की ओर से पूजा कुमारी बनाम संजय चतुर्वेदी मामले की सुनवाई के दौरान रांची सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 15 वकीलों को नोटिस जारी किए जाने के बाद शुरू हुआ विरोध फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।


Ranchi: रांची के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) सदर की ओर से पूजा कुमारी बनाम संजय चतुर्वेदी मामले की सुनवाई के दौरान रांची सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 15 वकीलों को नोटिस जारी किए जाने के बाद शुरू हुआ विरोध फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, रांची जिला बार एसोसिएशन के हालिया रुख से साफ है कि आंदोलन का दायरा अब पहले की तुलना में सीमित कर दिया गया है।
जिला बार एसोसिएशन की ओर से आधिकारिक पत्र जारी कर बताया गया है कि अब वकील सभी एग्जीक्यूटिव कोर्ट का बहिष्कार नहीं करेंगे। फिलहाल बहिष्कार सिर्फ सदर SDO और उनके अधीनस्थ मजिस्ट्रेट कोर्ट तक सीमित रहेगा।
SDO के नोटिस के बाद शुरू हुआ था विरोध
मामले में SDO की ओर से जिन वकीलों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें कुमार चतुर्वेदी, संजय कुमार विद्रोही, पवन रंजन खत्री, अमरेंद्र कुमार झा, कीर्ति सिंह उर्फ कीर्ति नारायण सिंह, कृष्णा सिंह, प्रमोद कुमार शर्मा, फर्दा उल रिमान, रितेश रोशन उपाध्याय, शंकर कुमार शर्मा, जगदीश प्रसाद साहू, शशि, MD अफरोज, समा परवीन और सहला तबस्सुम शामिल हैं।
नोटिस जारी होने के बाद वकीलों में नाराजगी देखी गई थी। इसके बाद रांची जिला बार एसोसिएशन की ओर से आंदोलन शुरू किया गया और वकीलों ने न्यायिक कार्य से भी खुद को दूर रखा था।
अब सिर्फ सदर SDO कोर्ट का बहिष्कार
शुरुआत में वकीलों के विरोध का दायरा व्यापक था और सभी एग्जीक्यूटिव कोर्ट के बहिष्कार की बात सामने आई थी। लेकिन अब जिला बार एसोसिएशन ने अपने आधिकारिक पत्र के जरिए स्थिति स्पष्ट कर दी है।
नए फैसले के मुताबिक रांची सिविल कोर्ट के वकील अब सिर्फ सदर SDO और उनके अधीनस्थ मजिस्ट्रेट कोर्ट का बहिष्कार करेंगे। बाकी एग्जीक्यूटिव कोर्ट में वकील न्यायिक कार्य करेंगे।
समय के साथ आंदोलन का दायरा हुआ सीमित
पहली बार नोटिस जारी होने के बाद वकीलों ने आंदोलन तेज करते हुए न्यायिक कार्य से दूरी बनाई थी। हालांकि, समय बीतने के साथ कार्य बहिष्कार का दायरा लगातार सीमित होता गया।
अब बार एसोसिएशन के नए रुख के बाद यह माना जा रहा है कि वकीलों ने आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने के बजाय इसे एक विशेष कोर्ट तक सीमित करने का फैसला लिया है।
फिलहाल सदर SDO और उनके अधीनस्थ मजिस्ट्रेट कोर्ट के बहिष्कार को लेकर वकीलों का विरोध जारी है।

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