कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा पर NIA का एक्शन तेज, 2022 के चाईबासा नक्सल कांड में 1 सितंबर को अगली सुनवाई
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत में 2.20 करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सागर से जुड़े मामले की अहम सुनवाई हुई।


Ranchi: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत में 2.20 करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सागर से जुड़े मामले की अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10वें गवाह नरेंद्रन पाल ने अदालत के समक्ष अपनी गवाही दर्ज कराई। अदालत ने गवाही दर्ज करने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 01 सितंबर की तिथि निर्धारित की है।
28 जुलाई को धनबाद-गिरिडीह सीमा से हुआ था गिरफ्तार
उल्लेखनीय है कि माओवादी संगठन के शीर्ष रणनीतिकारों में शामिल 2.20 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई 2026 की शाम धनबाद और गिरिडीह सीमा क्षेत्र अंतर्गत बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से एक विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना गया है।
सारंडा और आनंदपुर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की रची थी साजिश
यह पूरा मामला पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के आनंदपुर और सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों पर घातक हमलों की साजिश रचने और आईईडी (IED) विस्फोट करने से जुड़ा है। मिसिर बेसरा लंबे समय तक सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में अपने सशस्त्र दस्ते के साथ कैंप कर रहा था। उसके दस्ते ने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आनंदपुर और आसपास के जंगली रास्तों में जगह-जगह आईईडी बिछाए थे, जिसके चलते कई बार मुठभेड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं।
2022 में दर्ज हुआ था केस, 2023 में NIA ने किया था टेकओवर
जुलाई 2022 में आनंदपुर थाना पुलिस ने मिसिर बेसरा के दस्ते के लिए अवैध लेवी, रसद सामग्री जुटाने और संगठन के गोपनीय संदेश पहुंचाने के आरोप में उसके कुछ प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। इस संबंध में आनंदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ाव को देखते हुए NIA ने अगस्त 2023 में इस केस को टेकओवर कर लिया और NIA कांड संख्या 03/2023 दर्ज कर अपनी गहन जांच शुरू की थी। अदालत में लगातार गवाहों के बयान दर्ज कराए जा रहे हैं ताकि कुख्यात माओवादी नेता को कड़ी कानूनी सजा दिलाई जा सके।

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