हाई कोर्ट में PIL मैनेज करने के लिए हुई थी 3 करोड़ की डील!, CID के सामने अभय तिवारी का चौंकाने वाला कबूलनामा
CID को अब धर्मेन्द्र के साथ सानंद प्रकाश की सरगर्मी से तलाश है। जांच में सामने आया है कि सानंद प्रकाश और पतंजलि IAS एकेडमी में पढ़ाने वाले रवि मास्टर ने भी प्रतियोगी तलाशने से लेकर वसूली तक का काम संभाला

JPSC Scam: झारखंड के JPSC और JSSC भर्ती घोटाले में CID की गिरफ्त में आए मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट ऑफिसर (ACF) के पदों को बेचने के लिए 20 प्रतियोगियों से करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये की मोटी वसूली की गई थी। FRO के एक पद के लिए 20 से 25 लाख और ACF के लिए 30 से 35 लाख रुपये की बोली लगाई गई थी। दलालों के जरिए सेट किए गए 20 में से 19 अभ्यर्थी परीक्षा में पास भी हो गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें से दो प्रतियोगी खुद JPSC के दलाल भी थे।
पूर्व अध्यक्ष ख्यांगते पर जबरन रिजल्ट निकलवाने का आरोप
मामले की जांच कर रही CID के सामने उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल ख्यांगते पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्वेता का दावा है कि वह रिजल्ट जारी करने के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन पूर्व अध्यक्ष ने उन पर जबरन दबाव बनाया। ख्यांगते ने कथित तौर पर उनसे कहा था कि 'पीटी और मेन्स दोनों के नंबर तुम्हारे पास हैं, उसी के आधार पर तुरंत रिजल्ट निकालो।'
High Court में PIL मैनेज करने के लिए हुई थी 3 करोड़ की डील
अभय तिवारी ने CID को यह भी कबूला है कि JSSC और परीक्षा आयोजित करने वाली दागी एजेंसी TDPL के कारनामों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) को रफा-दफा करने की भी कोशिश की गई थी। इसे मैनेज करने के लिए 3 करोड़ रुपये की डील हुई थी, जिसके एवज में सैनिक मार्केट में दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति के हाथों 5 लाख रुपये का एडवांस भी दिया गया था। अभय के मुताबिक, इस डील की जानकारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी थी।
होटल से लेकर मैनपावर सप्लाई तक का खेल, TDPL से 10% कमीशन
काली कमाई के पैसों से अभय ने अपने पार्टनर उमेश कुमार के साथ मिलकर 'Sweet and Spice' और 'प्रकाश रेसिडेंसी' नामक होटल में निवेश किया। इसके अलावा उसने 'JSR एजेंसी' नाम से एक मैनपावर सप्लाई कंपनी भी खोली। इसी कंपनी की आड़ में उसने दिल्ली के शैंटी और कोडरमा के लालू के जरिए TDPL के संचालक सतपाल सिंह और रामवीर सिंह से डील पक्की की थी। परीक्षा का काम देखने के एवज में अभय को TDPL से 10% कमीशन मिलना तय हुआ था।
कोचिंग संचालक से लेकर कई शहरों के दलाल रैकेट में शामिल
इस पूरे रैकेट की जड़ें कई शहरों तक फैली हुई थीं। CID को अब धर्मेन्द्र के साथ सानंद प्रकाश की सरगर्मी से तलाश है। जांच में सामने आया है कि सानंद प्रकाश और पतंजलि IAS एकेडमी में पढ़ाने वाले रवि मास्टर ने भी प्रतियोगी तलाशने से लेकर वसूली तक का काम संभाला है। इसके अलावा पटना के इमरान, गिरिडीह के राजेश सिंह, बोकारो के शंकर और हजारीबाग का सुनील भी दलाल के तौर पर अभय तिवारी के गिरोह के लिए काम कर रहे थे। इन लोगों ने अभय के साथ मिलकर करोड़ों की वसूली की और अभ्यर्थियों को परीक्षाओं में पास करवाया।
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