Jharkhand (Jamshedpur): भारतीय सेना की गठित विशेष टीम द्वारा जमशेदपुर के दो बमों में से एक को उड़ा दिया गया है. यूं तो ऐसे बमों के ब्लास्ट की तीव्रता कापी अधिक होती है, जिसे कम करने के लिए सेना ने पर्याप्त उपाय कर रखे हैं.
बहरागोड़ा में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले संदिग्ध बम के कारण लोगों में भय व्याप्त है. दूसरे विश्वयुद्ध के समय काल के बताए जा रहे इस बम का वजन 227 किलो है. दोनों विशालकाय और जिंदा बमों को डीफ्यूज करने के लिए सेना की मदद ली जा रही है.

भारतीय सेना की एक विशेषज्ञों की टीम ने बम निष्क्रिय करने का मोर्चा संभाला है. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम घटना स्थल पर पहुंची.
टीम ने बम की स्थिति और आसपास के भूगोल का बारीकी से जायजा लिया. बम की विशालता और उसकी मानक क्षमता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. बम को धमाके के साथ निष्क्रिय करने के दौरान होने वाले नुकसान को शून्य करने के लिए सेना द्वारा वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है.

वहीं बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों की ऊंची दीवार खड़ी की जा रही है. बालू के अंदर एक विशेष गड्ढा भी तैयार किया गया है, ताकि विस्फोट का दबाव जमीन के अंदर ही अवशोषित हो सके. साथ ही पूरे साइट की सटीक मापी कर सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. जानकारी के अनुसार बम को उड़ाने के लिए नदी किनारे 100 मीटर गहरा गड्ढा बनाया गया है.
ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और सेना ने कड़े कदम उठाए हैं. बम डिफ्यूज करने के दौरान घटनास्थल से एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह से सील कर दिया गया है.
पहले बम के डीफ्यूजन की तस्वीर
जानकारी के अनुसार अगले बम को आधे घंटे बाद डिफ्यूज किया जाएगा.

रिपोर्ट: बिनोद केसरी









