चाइबासा की साइकिल लाइब्रेरी बनी आकर्षण का केंद्र, शिक्षक विमल किशोर बोइपाई की पहल बनी मिसाल
पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव में शिक्षक विमल किशोर बोइपाई की चलंत साइकिल लाइब्रेरी बच्चों तक किताबें व ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई की नई प्रेरणा और आत्मनिर्भरता जगा रही है.

Chaibasa, Jharkhand : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने अपनी अनोखी पहल से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में नई उम्मीद जगा दी है. शिक्षक विमल किशोर बोइपाई द्वारा शुरू की गई "चलंत साइकिल लाइब्रेरी सह स्व-अध्ययन केंद्र" यानि, मोबाइल साइकिल लाइब्रेरी के साथ सेल्फ स्टडी सेंटर, अब बच्चों में पढ़ाई के प्रति नई ललक और आत्मविश्वास पैदा कर रही है.

शिक्षक की पहल से शिक्षा के प्रति बढ़ेगी बच्चों में रुची
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर छुट्टियों के दौरान बच्चे पढ़ाई से दूर होकर दिनभर खेलकूद में व्यस्त हो जाते हैं. घरों में शैक्षणिक माहौल और संसाधनों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. ऐसे माहौल में शिक्षक विमल किशोर बोईपाई की यह पहल शिक्षा को बच्चों के घर और मोहल्लों तक पहुंचाने का माध्यम बन गई है.
साइकिल पर किताबें, अध्ययन सामग्री और सीखने का संदेश लेकर, बच्चों को गांव में घूम-घूम कर पुकार लगाती निकली यह साईकिल लाइब्रेरी अब बच्चों के बीच आकर्षण का केंद्र बन चुकी है. इसका असर यह है कि जो बच्चे पहले छुट्टियों में केवल खेलते नजर आते थे, वही अब अपने शिक्षक को फोन कर ऑनलाइन पढ़ाई कराने की इच्छा जता रहे हैं. यह बदलाव बच्चों में विकसित हो रही आत्म प्रेरणा और सेल्फ स्टडी के प्रति जागृत होती भावनाओं को दर्शाता है.
खुद के खर्चे से मुहैया कराते हैं ऑनलाइन शिक्षा
शिक्षक विमल के द्वारा बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिए मोबाइल फ़ोन और टेबलेट जैसे उपकरण भी अपने पैसे से मुहैया कराये हैं. ताकि ऑनलाइन शिक्षा की बाधा बच्चों को ना हो. ग्रामीण परिवेश में आज भी कई अभिभावक घर पर पढ़ाई और सेल्फ स्टडी के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पाते. सरकारी विद्यालयों के प्रति नकारात्मक सोच, उदासीनता और असहयोग के कारण शिक्षक की कक्षा में की गई मेहनत कई बार अधूरी रह जाती है. वहीं दूसरी ओर, एक सरकारी शिक्षक को शिक्षण कार्य के साथ कई गैर शैक्षणिक दायित्व भी निभाने पड़ते हैं.इन तमाम चुनौतियों के बावजूद विमल किशोर बोइपाई ने हार नहीं मानी. उन्होंने बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए “चलंत साइकिल लाइब्रेरी सह स्व-अध्ययन केंद्र” की शुरुआत की, ताकि किताबें, सीखने की आदत और पढ़ाई का माहौल उन बच्चों तक लगातार पहुंच सके, जहां संसाधनों और प्रेरणा दोनों की कमी है.
"बच्चों में खुद से पढ़ने की ललक होना जरूरी"
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों में खुद से पढ़ने और सीखने की आदत तेजी से विकसित हो रही है. शिक्षक विमल किशोर बोइपाई का मानना है कि शिक्षक केवल मार्गदर्शक हो सकता है, लेकिन मजबूत भविष्य के लिए बच्चों में खुद से पढ़ने की ललक होना जरूरी है. सेल्फ स्टडी की यही आदत उन्हें आगे चलकर आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाएगी.
पढ़ने की संस्कृति को मिलेगी मजबूती
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि अभिभावकों का भी सहयोग मिले, तो बच्चों का सर्वांगीण विकास और अधिक प्रभावी हो सकता है. आने वाले समय में यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी, बल्कि गांवों में पढ़ने की संस्कृति को भी मजबूत करेगी.
विमल किशोर बोइपाई कहते हैं कि यह प्रयास कितना सफल होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन शिक्षा के लिए किया गया हर सच्चा प्रयास किसी न किसी बच्चे के भविष्य में एक दिन जरूर उजाला लाएगा.

शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक बना मिसाल
विमल किशोर बोइपाई जैसे शिक्षक शिक्षा जगत के लिए वह दीया है, जो खुद जलकर भी दूसरों को रोशनी देने के काम में निस्वार्थ लगे रहते हैं. विमल किशोर जैसे शिक्षक की जरुरत आज भारत के हर एक स्कूल की जरुरत है. जो बच्चों को शिक्षा देना केवल अपनी ड्यूटी नहीं मानते बल्कि इसे पानी पहली प्राथमिकता बताते हुए इसे अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी मानते हैं और इसे पूरा करने के लिए हर विषम परिस्थितियों से लड़ने का रास्ता ढूंढ निकालते हैं.
"चलंत साइकिल लाइब्रेरी" केवल किताबें पहुंचाने की पहल नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में आत्मविश्वास, स्व-अध्ययन और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरणादायक अभियान बनकर उभर रही है.
(चाईबासा से रमेश दास की रिपोर्ट)
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