रांची में रसोइयों का उबाल, थाली पीटकर और सड़क पर खाना बनाकर सरकार तक पहुंचाई आवाज
रांची में झारखंड प्रदेश रसोईया संघ की हजारों महिलाएं अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं। थाली पीटकर और सड़क पर खाना बनाकर वे न्यूनतम मजदूरी, बीमा और पीएफ लागू करने की मांग कर रही.....

RANCH :- झारखंड विधानसभा सत्र के बीच राजधानी रांची में रसोइयों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर झारखंड प्रदेश रसोईया संघ की हजारों महिलाएं विधानसभा रोड स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास धरने पर बैठ गईं। इस दौरान रसोइयों ने थाली पीटकर विरोध जताया और गैस सिलेंडर व बर्तनों के साथ सड़क पर ही खाना बनाकर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की।
धरना स्थल पर झारखंड के अलग-अलग जिलों से पहुंची रसोइयां हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती नजर आईं। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने में शामिल हुईं। रसोइयों का कहना है कि वे वर्षों से स्कूलों में मिड-डे मील के तहत बच्चों के लिए भोजन बनाती आ रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें बेहद कम मानदेय मिलता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में वे सरकार से न्यूनतम मजदूरी, बीमा और पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाएं लागू करने की मांग कर रही हैं।

रसोइया संघ की क्या हैं प्रमुख मांगें?
झारखंड प्रदेश रसोईया संघ का कहना है कि राज्यभर में हजारों रसोइयां पिछले कई वर्षों से स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन बनाने का काम कर रही हैं। संघ के अनुसार अधिकांश रसोइयां साल 2004–05 से लगातार सेवा दे रही हैं, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
रसोइयों का आरोप है कि उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जाता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में संघ की मांग है कि सरकार रसोइयों को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाए, ताकि उन्हें सम्मानजनक वेतन मिल सके। इसके साथ ही सभी रसोइयों के लिए बीमा और पीएफ (प्रोविडेंट फंड) की सुविधा लागू की जाए, ताकि भविष्य में उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
इसके अलावा रसोइया संघ की यह भी मांग है कि सेवा के दौरान किसी रसोइया की मौत होने पर उसके आश्रितों को नौकरी दी जाए, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो। संघ का कहना है कि रसोइयां वर्षों से बच्चों का पेट भरने का काम कर रही हैं, लेकिन उनके अपने अधिकार अब तक अधूरे हैं।
संघ के अनुसार इन मांगों को लेकर 18 फरवरी से आंदोलन शुरू किया गया है, जो लगातार जारी है और अब इसे और तेज किया जा रहा है। रसोइयों का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
रसोइयों की मांगों को लेकर भाजपा विधायकों का प्रदर्शन
झारखंड विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने रसोइयों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
भाजपा विधायकों का कहना था कि वर्षों से स्कूलों में काम कर रही रसोइयां आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में सरकार को उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करना चाहिए।
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