ग्राम पंचायत में किया बेहतरीन कार्य, मुखिया तान्या प्रवीण को दिल्ली से आया बुलावा
तान्या प्रवीण की नेतृत्व यात्रा गांव की बुनियादी समस्याओं से शुरू होती है. मुखिया बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और सहभागिता को अपनी प्राथमिकता बनाया. ग्राम सभाओं की नियमित बैठकें, महिला सहभागिता को प्रोत्साहन और योजनाओं की सार्वजनिक निगरानी उनकी कार्यशैली की पहचान बनी.

BIHAR (EAST CHAMPARAN): पूर्वी चंपारण जिले के बंजरिया प्रखंड की सिसवा पूर्वी पंचायत आज एक बार फिर सुर्खियों में है. वजह है पंचायत की मुखिया तान्या प्रवीण को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए मिला विशेष आमंत्रण. यह आमंत्रण किसी एक व्यक्ति का सिर्फ सम्मान नहीं है, बल्कि यह उस पंचायत व्यवस्था की सफलता का प्रमाण है, जो गांव की जमीन से उठकर राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बना रही है.

सरकारी पत्र से मिली आधिकारिक पुष्टि
इस संबंध में बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के अधीन बिहार राज्य पंचायत संसाधन संस्थान (BSPRI) के परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी को पत्र जारी कर औपचारिक सूचना दी है. पत्र के अनुसार चयनित जनप्रतिनिधि और उनके जीवनसाथी के लिए 23 जनवरी को पटना से नई दिल्ली प्रस्थान और 27 जनवरी को वापसी तक की संपूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है. इससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस उपलब्धि को प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संस्थागत सम्मान के रूप में देख रही है.
गांव से शुरू हुई नेतृत्व की यात्रा
तान्या प्रवीण की नेतृत्व यात्रा गांव की बुनियादी समस्याओं से शुरू होती है. मुखिया बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और सहभागिता को अपनी प्राथमिकता बनाया. ग्राम सभाओं की नियमित बैठकें, महिला सहभागिता को प्रोत्साहन और योजनाओं की सार्वजनिक निगरानी उनकी कार्यशैली की पहचान बनी.
उनके नेतृत्व में सिसवा पूर्वी पंचायत को ‘महिला हितैषी ग्राम पंचायत’ के रूप में विशेष पहचान मिली. महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त किया गया, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों की सतत निगरानी से शिक्षा और पोषण व्यवस्था में सुधार देखने को मिला.
स्वच्छता से डिजिटल पंचायत तक
स्वच्छता अभियान को लेकर पंचायत में विशेष अभियान चलाए गए. शौचालय निर्माण, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता ने पंचायत की तस्वीर बदल दी. इसके साथ ही डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन और आवास योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, जिससे ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़े.

राष्ट्रीय मंच पर पहले भी पहचान
गणतंत्र दिवस परेड का यह आमंत्रण अचानक नहीं आया. इससे पहले भी तान्या प्रवीण को उनके कार्यों के लिए राष्ट्रीय मंचों पर सराहा जा चुका है. 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान’ में उन्हें केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा सम्मानित किया गया था.
वर्ष 2023 में लोहिया स्वच्छ भारत अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया गया. वहीं 18–19 दिसंबर को हैदराबाद में आयोजित निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय कार्यशाला में उन्होंने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए पंचायत स्तर के नवाचारों और चुनौतियों को साझा किया.
मुखिया की जुबानी
इस उपलब्धि पर मुखिया तान्या प्रवीण कहती हैं,
“पंचायत लोकतंत्र की नींव है. अगर गांव में सही दिशा में ईमानदारी से काम हो, तो उसका असर समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है. गणतंत्र दिवस परेड का आमंत्रण मेरे लिए व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि सिसवा पूर्वी पंचायत की सामूहिक मेहनत की पहचान है.”

गांव में गर्व और उत्सव का माहौल
जैसे ही गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने की खबर गांव पहुंची, सिसवा पूर्वी पंचायत में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, पारदर्शिता और निरंतर प्रयास से एक सामान्य पंचायत भी राष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकती है.
ग्रामीण महिलाओं के लिए यह उपलब्धि खास मायने रखती है. कई महिलाओं का कहना है कि मुखिया के नेतृत्व में उन्हें न सिर्फ योजनाओं का लाभ मिला, बल्कि अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
बिहार की पंचायत व्यवस्था के लिए संदेश
गणतंत्र दिवस जैसे ऐतिहासिक और राष्ट्रीय आयोजन में एक ग्राम पंचायत की मुखिया की भागीदारी बिहार की पंचायती राज व्यवस्था की सफलता और परिपक्वता को दर्शाती है. यह उदाहरण आने वाली पीढ़ियों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं और युवा नेतृत्व के लिए प्रेरणा बनेगा.
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