UP (Lucknow): ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सीएम पर पलटवार करते हुए हिंदू होने का प्रमाण देने को कहा है. इसके लिए उन्होंने 40 दिनों का अल्टीमेटम भी रखा है. साथ ही कहा गया है कि 40 दिनों के अंदर यदि नहीं देते हैं कोई प्रमाण तो उन्हें नकली हिंदू घोषित कर दिया जाएगा और उन्हें उतारना पड़ेगा गेरुआ चोला.
सीएम ने मांगा था शंकराचार्य होने का प्रमाण
बता दें कि पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण देने की मांग की थी. जिसके जवाब में शंकराचार्य ने भी सीएम से खुद को हिंदू साबित करने को कहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि 40 दिनों के भीतर सीएम को प्रमाण जारी करने के साथ यूपी में गो-माता को राज्य माता घोषित करने को कहा. ऐसा नहीं किए जाने के पर देश भर के साधु-संत लखनऊ पहुंचेंगे और सीएम को हिंदू धर्म से बाहर निकाल दिया जाएगा.इसके लिए 10-11 मार्च की तारीख रखी गई है.
धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा
शंकराचार्य ने कहा कि लगता है स्वतन्त्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बन्दी कानून की मांग करना ही सबसे बडा अपराध हो चुका है. तभी तो जब-जब जिसने भी यह आवाज उठाई सरकारों ने उसे क्रूरता पूर्वक रौंद दिया. उदाहरण 1966 का दिल्ली का गोरक्षा आन्दोलन है जिसमें तत्कालीन सरकार ने जाने कितने गोभक्तों को गोलियों से भून दिया और धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज सहित प्रमुख सनातनियों पर भी तरह-तरह के अत्याचार किये. अब उसी आवाज को बुलन्द करने के कारण हमें और हमारा इस कार्य में सहयोग कर रहे गोभक्तों पर भान्ति-भान्ति के अत्याचार और अन्याय हो रहे हैं जिन्हें आप सब देख ही रहे हैं. यहां तक की हमसे हमारे शङ्कराचार्य होने का प्रमाण तक मांगा जा रहा है और हमारी छवि को सनातनी जनता के बीच धूमिल करने के तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. इन सबका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों रामभद्राचार्य आदि के माध्यम से कर रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ से शंकराचार्य ने कहा कि-
"हमारा प्रमाण पत्र तो आपने मांग लिया, अब मुख्यमंत्री जी को देना होगा अपने 'हिन्दू' होने का प्रमाण"
भैंस के मांस की आड़ में गो-हत्या
प्रेसवार्ता के दौरान योगी सरकार से मांगें रखी गई, जिसमें गोहत्या की समाप्ति सबसे प्रमुख हैं. साथ ही कहा गया कि भैंस के मांस की आड़ में भी षड्यंत्र किया जा रहा है. आरोप लगाते हुए कहा कि भैंस के मांस की बिक्री की आड़ में गौ-मांस की बिक्री की जा रही है.
जन-जन का आह्वान
"यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का प्रश्न है. उत्तराखण्ड ने 'राष्ट्रमाता' का प्रस्ताव दिया, महाराष्ट्र ने 'राज्यमाता' बनाया तो फिर भगवान राम और कृष्ण की धरती 'उत्तरप्रदेश' मांस निर्यात का केन्द्र क्यों बनी हुई है? मुख्यमंत्री जी, बस कुछ क्षण और प्रतीक्षा है. निर्णय अब आपके हाथ में है कि आप संतों के आशीर्वाद के पात्र बनेंगे या इतिहास के कठघरे में नकली हिन्दू के रूप में दर्ज होंगे."
रिपोर्ट: हरेंद्र शुक्ला









