UP (Lucknow): UGC के नए नियम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. बीते दिनों यूजीसी का 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026' लाया गया है. यूजीसी के नियमों को लेकर भाजपा में बगावत के सुर उठने लगे हैं. लखनऊ में बीकेटी विधानसभा क्षेत्र के 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से जिला अध्यक्ष को अपना इस्तीफा दे दिया है. इसका त्याग पत्र भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है.
11 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
बीकेटी विधान सभा क्षेत्र में अभी भाजपा से योगेश शुक्ला विधायक हैं. यहां से यूजीसी नियमों को लेकर इस विधानसभा के कुम्हरावां मंडल के महामंत्री समेत 11 पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे का पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मंडल महामंत्री अंकित तिवारी और मंडल मंत्री महावीर सिंह ने जिलाध्यक्ष को लिखे गये इस्तीफे की पुष्टि कर दी है.
उनके साथ-साथ मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, शक्ति केंद्र संयोजक मोहित मिश्र, वेद प्रकाश सिंह , नीरज पांडेय, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनूप सिंह, मंडल महामंत्री राज विक्रम सिंह, पूर्व मंडल मंत्री अभिषेक अवस्थी, बूथ अध्यक्ष विवेक सिंह और पूर्व सेक्टर संयोजक कल सिंह ने इस्तीफा दे दिया है.
अंकित तिवारी ने कहा कि हमारे प्रेरणा श्रोत पंडित दीन दायल उपाध्याय जी एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस उद्देश्य से पार्टी का निर्माण किया था, पार्टी उससे भटक रही है. पार्टी के श्रेष्ठ पदाधिकारियों ने यूजीसी कानून लागू करके हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया है. इस कारण मैं अपने पद से त्यागपत्र देता हूं. मैं पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं रहूंगा.
क्या है यूजीसी का नया नियम, जिसका हो रहा विरोध?
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को एक समान अवसर केंद्र स्थापित करना होगा और उसे नागरिक समाज समूहों, जिला प्रशासन, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, स्थानीय मीडिया और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करना होगा. यह केंद्र कानूनी सहायता की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला और राज्य विधि सेवा प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करेगा. अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है. इसी बात का अगड़ी जाति के लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है. वहीं, पिछड़ा समाज में इस बात को लेकर खुशी है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है.
"क्या बिना आरक्षण वाले परिवारों में पैदा होना गुनाह है?"
एक्स पर एक यजूर ने कहा-
यूजीसी के नए 'समानता' नियम 2026 बेशर्मी से सामान्य वर्ग के छात्रों को परिसरों में हिंसा का दोषी ठहराते हैं. केवल इसलिए कि वे गैर-आरक्षित परिवारों में पैदा हुए हैं! समानता समितियां हमारे विरुद्ध हैं, झूठे दावों से कोई सुरक्षा नहीं है, और कॉलेज परिसर जातिगत युद्धक्षेत्र बनते जा रहे हैं.









