रांची JAP 1 में अनोखी परंपरा: दुर्गा मां की प्रतिमा नहीं...कलश स्थापना कर की जाती है पूजा
दशहरा एक महत्वपूर्ण पर्व है इसे गोरखा जवान उल्लास के साथ मनाते हैं आज फूलपाती यानी सप्तमी है फूलपाती एक निमंत्रण है इस दिन जवान देवी सरस्वती को लेकर जाते हैं और कत्यानी देवी को मनाकर लाते है.

Naxatra News Hindi
Ranchi Desk: राजधानी रांची में दुर्गोत्सव की धूम है इस समय पूरे रांची में भक्तिमय का माहौल है. मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की भक्त आराधना कर रहे हैं. इस बीच JAP 1 (झारखंड आर्म्ड फोर्स वन) के गोरखा जवान अपने परंपरागत तरीके से माता दुर्गा की पूजा-अर्चना कर रहे हैं. दरअसल, दुर्गोत्सव में यहां माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा नहीं है बल्कि कलश स्थापना करने की परंपरा है और इसे ही जवान देवी का स्वरूप मानकर शक्ति की आराधना करते हैं.
SSP राकेश रंजन ने JAP 1 पहुंचकर की विधिवत पूजा
आज फूलपाती पूजा (सप्तमी) के साथ मां कत्यानी को आमंत्रण दिया जाता है. फूलपाती पूजा के लिए आज रांची एसएसपी सह जैप 1 CO राकेश रंजन यहां पहुंचे. जहां उन्होंने विधि-विधान के साथ फूलपाती की पूजा की. इस संबंध में एक भक्त ने बताया कि दशहरा एक महत्वपूर्ण पर्व है इसे वे उल्लास के साथ मनाते हैं आज फूलपाती यानी सप्तमी है फूलपाती एक निमंत्रण है इस दिन वे देवी सरस्वती को लेकर जाते हैं और कत्यानी देवी को मनाकर लाते है.
सदियों पुरानी है रांची जैप 1 की यह परंपरा
बता दें, रांची जैप 1 में यह परंपरा सदियों पुरानी है. यह परंपरा वर्ष 1880 से चली आ रही है जिसे आज भी गोरखा जवानों द्वारा मनाया जाता है. यह पूजा फायरिंग सलामी और शस्त्रों की पूजा की परंपरा भी जुड़ी है. परंपरा के मुताबिक, माता शक्ति को फायरिंग कर सलामी दी जाती है. गोरखा जवानों के लिए महानवमी का दिन विशेष महत्व रखता है. इस दिन अपने हथियारों को वे माता दुर्गा के चरणों में अर्पित करते हैं और उनकी आराधाना करते हैं. गोरखा ब्रिगेड का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है, लेकिन पूजा की परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है.
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