Godda में बूंद-बूंद पानी को तरस रहा आदिवासी गांव, चापाकल ठप्प हैं और सिस्टम की आंखों पर बंधी है पट्टी
गोड्डा जिले के धनकुड़िया गांव में ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. वोट मांगने के लिए सिर्फ दर्शन देने वाले नेताजी को कोई सुध नहीं कि लोग बूंद-बूंद पानी की खातिर तरस रहे हैं.
Godda, Jharkhand: जिले में सूरज मानो आग उगल रहा है. वहीं इस तपती धरती से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करती है. साहब… पानी तो दे दो! ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि हकीकत है उस दर्द की, जो झारखंड के गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड के धनकुड़िया पंचायत के रजौन आदिवासी गांव में हर दिन जिया जा रहा है.
करीब 60 आदिवासी परिवारों वाले इस गांव में 3 सरकारी चापाकल हैं, लेकिन विडंबना देखिए तीनों महीनों से खराब पड़े हैं! गांव की महिलाएं और बच्चे कुएं का गंदा, मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं. यह सिर्फ पानी की किल्लत नहीं है… यह उस सिस्टम की नाकामी है, जिसने विकास के बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन इन प्यासे होंठों तक राहत की एक बूंद भी नहीं पहुंचा पाया.
गांव वालों का कहना है कि कई बार मुखिया को चापाकल ठीक कराने की सूचना दी गई… लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. वादे हुए, आश्वासन मिला लेकिन जमीनी हकीकत? सिर्फ सूखा और प्यास! सरकार बदली विधायक बदले सांसद बदले अधिकारी बदले लेकिन अगर कुछ नहीं बदला, तो वो है सिस्टम की बेरुखी और लापरवाही.
जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो गांव के लोगों ने नक्षत्र न्यूज का दरवाजा खटखटाया है. अब सवाल ये है कि क्या खबर दिखने के बाद जागेगा सिस्टम? ये तस्वीरें किसी रेगिस्तान की नहीं हैं… ये उस राज्य की हैं, जहां विकास के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते हैं. लेकिन असली सवाल यही है क्या इन प्यासे लोगों तक कभी विकास पहुंचेगा भी?
Report By - Prince Yadav
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

Assam Assembly Election Results 2026: चुनाव आयोग के रुझानों में Hemant Soren की JMM इस सीट से चल रही आगे

BSPS सदस्यता अभियान में सैकड़ों पत्रकारों ने ग्रहण की सदस्यता, उपेन्द्र शंखवार बनाए गए रांची जिला सचिव







