कुड़मी समाज के ''रेल टेका, डहर छेका'' आंदोलन के खिलाफ सड़कों पर उतरा आदिवासी संगठन
आदिवासी श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर कुड़मी समाज 'रेल टेका, डहर छेका' अनिश्चितकालीन आंदोलन आज से शुरु किया है वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज के लोग कुड़मी समाज के इस आंदोलन का विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं.

Naxatra News Hindi
Ranchi Desk: एक ओर झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में कुड़मी समाज का आदिवासी श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर 'रेल टेका, डहर छेका' अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हो गया है जिसमें कुड़मी समाज के लोगों के साथ आजसू के सुप्रीमो सुदेश महतो सहित सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और पूर्व विधायक लंबोदर भी रेल टेका, डहर छेका आंदोलन में शामिल हुए. तो वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज के लोग कुड़मी समाज के इस आंदोलन का विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं. आदिवासियों का मानना है कि कुड़मी आदिवासियों का हक लेने के लिए आंदोलन कर रहे हैं इसको हम कभी पूरा नहीं होने देंगे.
कभी आदिवासी नहीं थे कुड़मी समुदाय के लोग- आदिवासी संगठन
राजधानी रांची में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज और संगठन के लोग सड़कों पर उतरकर कुड़मी समाज की मांगों का विरोध कर रहे हैं. जोन्हा में भी आदिवासी एकता संघर्ष समिति ने कुड़मी समुदाय के आंदोलन के खिलाफ विरोध मार्च निकाला. उनका कहना है कि कुड़मी समुदाय के लोग आदिवासी नहीं है वो खुद को आदिवासी कहते हैं लेकिन वे लोग न कभी आदिवासी थे न है और न कभी रहेंगे. वे लोग आदिवासियों का हक और आरक्षण छिनने के लिए षडयंत्र के तहत ST दर्जा से हटाए जाने की बात कह रहे हैं लेकिन वैसा कुछ नहीं है. हमलोग उन्हें आदिवासी समुदाय का दर्जा लेने नहीं देंगे. ये हमारा छोटा आंदोलन है जरूरत पड़ी तो भव्य रुप से आंदोलन किया जाएगा.
'कुड़मी समाज ने शुरू से आदिवासियों को धोखा दिया'
एक अन्य ने कहा कि कुड़मी समुदाय का आदिवासी समाज के साथ कोई मेल नहीं है. उन लोगों द्वारा फर्जी नीति नियम बनाया जाता है आदिवासियों के साथ उन लोगों ने दोस्ती किया उन्हें हमलोग फूलप्राण के नाम से जानते है. उनलोगों ने हथियार बनाकर पहले हमारा जमीनों को लूटने और कब्जा करने का काम किया. राजनीतिक पार्टियां बनाई. ये झारखंड डेवलप की पार्टी नहीं बल्कि आदिवासियों की जमीन लूटने, हक-अधिकार छिनने, आरक्षण और सरकारी योजनाओं में मिलने वाला लाभ को लूटने का प्रयास है. इनकी मानसिकता और कोई नहीं है. कुड़मी समाज के लोगों ने शुरू से आदिवासियों के साथ धोखा किया है.
कुड़मी समुदाय के साथ आंदोलन में शामिल हुए आजसू नेता
वहीं, कुड़मी को आदिवासी का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर कुड़मी समाज के लोगों के साथ आजसू के नेता भी 'रेल टेका, डहर छेका'अनिश्चितकालीन आंदोलन में शामिल हुए. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो मुरी रेलवे स्टेशन में लोगों के साथ आंदोलन में शामिल हुए तो आजसू सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और पूर्व विधायक लंबोदर महतो जागेश्वर रेलवे स्टेशन में कुड़मी समाज के लोगों के साथ आंदोलन में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि केंद्र सरकार को उनकी मांगों को मानना ही पड़ेगा. जबतक सरकार उनकी मांग को नहीं मानती है तबतक वे इस आंदोलन को जारी रखेंगे.
आदिवासी दर्जा की मांग एक लंबी लड़ाई है- सुदेश महतो
'रेल टेका, डहर छेका'आंदोलन के दौरान आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि राज्य के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों में अपने हक और अधिकार की मांग के लिए उतरे हैं उम्मीद है कि कुड़मी समाज के इस लड़ाई को उचित पटल पर सुना जाएगा. इसका राजनीतिक बल पर हम सब मिलकर निकालेंगे. आदिवासी समाज द्वारा कुड़मी समाज के प्रदर्शन के विरोध को लेकर सुदेश महतो ने कहा कि उनका विरोध एक षडयंत्र का भाग हो सकता है. कुड़मी समाज तथ्यों के आधार पर एसटी का दर्जा दिलाने की मांग कर रहा है. सुदेश महतो ने कहा कि ये हमारी एक लंबी लड़ाई है. हम फिर से आवाज बुंलद कर रहे हैं कुड़मी समाज समय के साथ आगे बढ़ा और एकजुट हुआ है समाज के लोग आज भी कई विषयों को लेकर दिगभ्रमित रहते हैं जो लोग हमारे समाज को राजनीतिक लाभ के लिए भड़काने का काम कर रहे हैं हमें सबपर नजर है. सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड में दोनों बड़े समुदाय को साथ में लेकर आगे बढ़ेंगे.
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