झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब डॉक्टरों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है । लंबे समय से रेजिडेंट डॉक्टर, पीजी छात्र और इंटर्न को मिलने वाले स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग करते आ रहे हैं। अब सभी डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन - जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क ने सरकार से की है मांग। सोमवार को काला बिल्ला लगाकर हुआ काम काज झारखंड में कुल 6 सरकारी मेडिकल कॉलेज है जो राज्य सरकार के अधीन आते है और एम्स देवघर केंद्र सरकार के अधीन । लेकिन 5 ऐसे मेडिकल कॉलेज है जिनमें बीते कई वर्षों से स्टाइपेंड बढ़ाया नहीं गया है । सोमवार को सभी पांच मेडिकल कॉलेज में काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। मांग पूरी नहीं होने तक हर सोमवार काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज (SNMMCH), धनबाद शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज (SBMC), हजारीबाग दुमका मेडिकल कॉलेज, दुमका मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज, पलामू IMA JDN ने राज्य सरकार को लिखा पत्र झारखंड स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन - जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (आईएमए जेडीएन) की ओर से झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग को कई पत्र भेजे गए है। जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट्स, पीजी छात्रों और इंटर्न्स के लिए स्टाइपेंड को हर तीन साल में संशोधित करने के लिए एक अनिवार्य तंत्र को संस्थागत रूप देने का अनुरोध किया गया है ताकि बढ़ती महंगाई के साथ तालमेल बिठाया जा सके। अन्य राज्यों के तर्ज पर हो रही स्टाइपेंड की मांग झारखंड के राज्य मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट को पहले वर्ष में ₹80,000, दूसरे वर्ष में ₹82,500 और तीसरे वर्ष में ₹85,000 मिलते हैं। जबकि पड़ोसी राज्य बिहार के PMCH के सीनियर डॉक्टरों को सालाना करीब 15 लाख रूपये तक मिलते है । पीजे छात्रों को झारखंड में प्रथम वर्ष ₹54,500, द्वितीय वर्ष ₹58,500, और तृतीय वर्ष ₹63,500 मिलते है। भारत में NEET PG स्टाइपेंड राज्य और कॉलेज के अनुसार औसत राशि ₹50,000 से ₹1,00,000 प्रति माह के बीच होती है। इन मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न को ₹17,500 का मासिक स्टाइपेंड मिलता है। वही बिहार में इंटर्न के लिए राशि अब ₹27000 तक कर दी गई है । मांगे पूरी नहीं होने पर जल्द की जाएगी हड़ताल IMA JDN ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल स्टाइपेंड बढ़ने पर फैसला नहीं लिया जाता है तो आने वाले 6 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर सभी रेजिडेंट डॉक्टर और इंटर्न चले जाएंगे। इस हड़ताल से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है ।






