आदिवासी नेता निशा भगत ने लगाया आरोप, पार्टियों के दलाल कर रहे आदिवासी समाज को गुमराह
रांची में कुर्मी आंदोलन के विरोध में आयोजित महारैली के दौरान आदिवासी नेता निशा भगत को मंच से उतार दिया गया. माइक छीनने की घटना के बाद विवाद बढ़ा. निशा ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज को राजनीतिक लाभ के लिए गुमराह किया जा रहा है और असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है.

रांची : आदिवासी नेता के रूप में उभरी निशा भगत को मंच से नीचे उतार दिया गया. दरअसल आदिवासी समाज द्वारा कुर्मी आंदोलन के विरोध में महारैली का आयोजन किया गया था. मंच पर आसीन हो निशा भगत जनता को संबोधित कर रही थी, तभी उन्हें अन्य मंचासीन व्यक्तियों द्वारा धकेल कर नीचे उतार दिया गया.
"आदिवासी समाज को कर रहे गुमराह"
मंच से जबरन उतारे जाने के बाद निशा ने जमकर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनके मुद्दों से भटकाने का काम किया जा रहा है. असल मुद्दे से गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की सिर्फ बात की जा रही है. कहा कि घाटशिला उपचुनाव को लेकर आदिवासी समाज का फायदा उठाने का प्रयास किया जा रहा है. यह भी आरोप लगाया कि आदिवासी नेताओं को जगह न देकर महारैली के दौरान कांग्रेस व जेएमएम के नेताओं ने जगह हथिया लिया.
जानकारी के अनुसार जब मंच से देवकुमार धान जनता को संबोधित कर रहे थे. उसी वक्त निशा भगत ने उनसे माइक छीन लिया. बात कुछ बढ़ने पर उन्हें मंच से उतार दिया गया. जिसके बाद उपरोक्त प्रकरण सामने आया.
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