जिसकी मेहनत से पलता था परिवार, उसको मरता छोड़ गया मालिक, वफादार ऊंट ने तोड़ा दम
रांची के चान्हो प्रखंड में एक ऊंट ने अपने मालिक की दयाहीनता के कारण दम तोड़ दिया. ऊंट बीमार था, काफी साल तक अपने मालिक के साथ उसके परिवार का पेट भरने में उसने सहयोग किया. वहीं उस बेचारे मूक प्राणी को बीमारी की हालत में उसका मालिक छोड़कर चला गया.

Jharkhand (Chanho): चान्हो प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत अंतर्गत नवाडीह गांव से मानवता को झकझोर देने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है. यहां ऊंट के सहारे चंदा मांगकर अपने परिवार का पेट पालने वाला एक व्यक्ति, उसी ऊंट के बीमार पड़ते ही उसे गांव के पास छोड़कर फरार हो गया. इलाज और देखभाल के अभाव में ऊंट की देर रात मौत हो गई.

मालिक ऊंट पर घूम-घूमकर जुटाता था पैसे
बताया जाता है कि उक्त व्यक्ति शुक्रवार को चान्हो क्षेत्र के विभिन्न गांवों में घूम-घूमकर अपने और ऊंट के लिए पैसे व सामान चंदे के रूप में इकट्ठा कर रहा था. शाम के समय नवाडीह गांव के समीप ऊंट अचानक बीमार पड़ गया. इसी दौरान उसका मालिक, जो वर्षों से ऊंट की मेहनत पर निर्भर था, उसे वहीं बेसहारा छोड़कर भाग खड़ा हुआ. मामले की सूचना मिलते ही पंचायत के मुखिया महादेव भगत ने इसे गंभीरता से लिया और वन विभाग से संपर्क साधा. रात में स्थानीय युवकों के साथ मुखिया ने ऊंट को कंबल से ढंककर बचाने की कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद देर रात ऊंट ने दम तोड़ दिया.
जिसकी मेहनत से पलता था परिवार, उसको मरता छोड़ दिया
यह घटना कई सवाल खड़े करती है. जिस ऊंट ने बीमार होने के बावजूद दिन-रात मेहनत कर अपने मालिक और उसके परिवार का पेट भरा, उसी ऊंट को बीमारी में बेसहारा छोड़ देना आखिर कैसी इंसानियत है? बहरहाल, शनिवार को मुखिया महादेव भगत ने जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर सम्मानपूर्वक ऊंट को दफन कराया.
हमारे भरोसे ही होते हैं मूक प्राणी
उदाहरण के तौर पर आप किसी रोज मैदान में टहल रहे हों, तभी एक कुत्ता आपके करीब आता है. आप उसे हल्का सा दुलार करते हैं, उसे हाथों से सहला देते हैं. कुछ देर उसे समय देते हैं और अपने घर आ जाते हैं. आपको विस्मय हो सकता है, लेकिन जब आप अगले दिन मैदान जाएंगे तो वही कुत्ता दौड़ता हुआ आपके पास आएगा. कुछ खाने की चीजों की चाह में नहीं, बल्कि आपके दुलार की चाहत में. वहीं आप कभी बिस्किट आदि खिला दें, तो आपको वह मूक प्राणी हमेशा याद रखेगा. आम भाषा में कहें तो हमेशा आपके प्रति उसकी वफादारी उस एक बिस्किट से सुनिश्चित हो जाती है.
मानवता पर सवाल उठाती यह घटना
सवाल यह भी उठता है कि एक इकलौते इंसानों को ही चेतना शक्ति सौंपी गई है. ऐसे में हम किसी मूक प्राणी का पालन-पोषण करते हैं, तो यह हमारी ही जिम्मेदीरी बनती है कि उसकी बीमारी की हालत में भी उसका ख्याल रखें. नवाडीह की यह घटना न सिर्फ एक ऊंट की मौत की कहानी है, बल्कि इंसान और इंसानियत के बीच बढ़ती दूरी की एक दर्दनाक तस्वीर भी है.
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