Ranchi News: जमशेदपुर में आज, गुरुवार (26 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कदमा मरीन ड्राइव स्थित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एंव सांसकृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट के भूमि पूजन समारोह में शामिल हुई. इस दौरान इस समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जमशेदपुर से लोकसभा सदस्य विद्युत वरण महतो, विधायक सरयू राय और विधायक पूर्णिमा साहू उपस्थित रहें.
वहीं इस समारोह में अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज का समय सही समय है बहुत दिनों से यह समय का इंतजार किया जाता था जब से मैं झारखंड में थी तब से. कहते है दूर है तो दुरुस्त है सब्र का फल मीठा होता है. उनकी कृपा पूरी मानवता पर बिना किसी भेदभाव के समान रुप से बरसती है. जगन्नाथ का भात...जगत पसारे हाथ...मत पूछो जात-पात यानी जगन्नाथ के द्वार में कोई जात-पात नहीं है. जगन्नाथ जगत के नाथ कहलाते है. राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के धरती पर आकर महा-प्रभु जगन्नाथ से जुड़े पवित्र कार्यों का अवसर मिलने पर मैं खुद को परम-सौभाग्य मानती हूं झारखंड में आकर मेरी अनेक स्मृतियां जीवंत हो जाता है. मेरे समय में मुझे सेवा करने का मौके दिया गया वह ताजा हो रहा है. राज्यपाल के रुप में यहां के लोगों की सेवा करने का आशीर्वाद मुझे मिला. वह मेरा विशेष शक्ति है.
विभिन्न समुदाय के लोग यहां रहते हैं मिल-जुलकर- राष्ट्रपति
कोल्हान का ये क्षेत्र जीवन जनजातियों, परंपराओं के साथ देश की अन्य आध्यात्मिक परंपराओं की संगम का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है यहां के लोगों ने सदियों से चली आ रही परंपराओं को संजोकर रखा है. विभिन्न समुदाय के लोग यहां मिल-जुलकर रहते हैं. ये सामाजिक सौहार्द प्रभु जगन्नाथ की भक्ति का प्रमुख आयाम है. पुरी में स्थित जगन्नाथ प्रभु के परम पवित्र मंदिर के निर्माण की कथाओं में हमें विभिन्न समुदाय के सम्मिलन के संदेश मिलते हैं. जमशेदपुर में निर्मित होने वाला मंदिर आध्यात्मिक और सामाजिक सौहार्द का प्रमुख केंद्र बनेगा.
झारखंड में एक जनजाति समुदाय के लोग अधिक रहते हैं मुझे लगता है कि वे भी इस जगन्नाथ मंदिर का दर्शन करेंगे और यहां भविष्य में जो भी सुख सुविधाएं उपलब्ध होगी वह उन्हें भी मिलेगी. भक्ति की विभिन्न धाराओं के लोग एक महाधारा में अवगाहन करेंगे. ये बहुत ही अच्छी ही बात है. रथ यात्रा में जिस भावना के साथ अत्यंत विश्वस्त जनसमूह की भागीदारी होती है. वह अद्भुत है. पूरी विश्वास से ये समाज के लोग हर्ष से बात करते हैं देश विदेश में रथ यात्रा का आयोजन हो रहा है. इसके साथ ही देश विदेशों में प्रभु जगन्नाथ के मंदिर का स्थापन हो रहा है.
पर्यावरण की सुरक्षा हमारी अध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी है- राष्ट्रपतिव
विश्व में विभिन्न स्थानों पर हो रही युद्धों और संघर्षों के कारण मेरे मन में चिंता और दुख होता है लेकिन प्रभु जगन्नाथ के प्रति बढ़ती हुई आस्था देखकर और भारत की आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति विश्व समुदाय में बढ़ती हुई सम्मान को देखकर मुझे संतोष हो रहा है. विश्वास से भगवान मिलते है इसलिए विश्वास जागृति होनी चाहिए. पर्यावरण की सुरक्षा हमारी अध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी हुई है. पेड़, नदियां, चांद-सूरज की हम पूजा करते हैं. आदिवासी लोग पेड़-पौधे को पूजा करते हैं. जात पात भिन्न नहीं हैं हम सब अभिन्न हैं हमें पेड़ पौधे का सम्मान करने की शिक्षा मिलती है.
बालिका छात्रावास को देना चाहिए विशेष महत्व- राष्ट्रपति
जगन्नाथ चारों तरफ है वे सभी जगह विराजमान है यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि श्री जगन्नाथ ट्रस्ट द्वारा सामाजिक कल्याण के सभी कार्य किए जाएंगे. इस सेवा संकल्प के लिए ट्रस्ट से जुड़े सभी लोगों को बहुत सराहना करती हूं. क्योंकि केवल भगवान से प्रार्थना करने से हमारे विकास के लिए जो जरूरत है वह आत्मिक रुप से तैयार करने से आध्यात्मिक विकास होता है लेकिन शारीरिक संचालन के लिए शिक्षा और मानसिक विकास की जरूरत होती है.
मुझे प्रसन्नता है शिक्षा के लिए ट्रस्ट काम कर रही है जो परिवार आर्थिक रुप से संपन्न नहीं है उन्हें आप प्राथमिकता दें. छात्रावास बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराएं. मैंने आरंभिक शिक्षा के बाद भुवनेश्वर में बालिका छात्रावास में रखकर अपनी माध्यमिक और उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त की थी. ऐसी सुविधा के बिना शायद मैं अपनी पढ़ाई आधा-अधूरा छोड़ देती और आज आपके सामने मुझे बोलने का मौका मिला है वह शायद नहीं हो पाता. राष्ट्रपति ने कहा कि बालिका छात्रावास को विशेष महत्व देना चाहिए.
प्रभु जगन्नाथ के नाम से केंद्र की स्थापना अत्यंत सार्थक- राज्यपाल
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एंव सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र के भूमि पूजन का पावन कार्य राष्ट्रपति के कर कमलों द्वारा संपन्न होना अत्यंत सौभाग्य का विषय है. सौभाग्य की बात है कि लौह नगरी जमशेदपुर केवल उद्योगों का नगर नहीं बल्कि अनुशासन, श्रम, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक भी है. इस नगर की पहचान विश्व विख्यात औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप और विशेष रुप से टाटा स्टील से जुड़ा है. जमशेदजी टाटा का स्वप्न केवल औद्योगिक विकास तक ही सीमित नहीं था बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा की व्यापक दृष्टि से प्रेरित था. यही कारण है कि जमशेदपुर को लौह नगरी के साथ-साथ एक आदर्श नगर के रुप में भी प्रतिष्ठा प्राप्त की है. यहां उद्योग और मानवीय संवेदना का अद्भुत समन्वय देखा जाता है.
ऐसी पावन भूमि पर प्रभु जगन्नाथ के नाम से इस केंद्र की स्थापना अत्यंत सार्थक है. जगन्नाथ अथार्त समस्त जगत के स्वामी, प्रभु जगन्नाथ का दर्शन करुणा, समावेश और लोक कल्याण की प्रेरणा देता है. साथ ही श्रद्धा का सेवा का संदेश प्रदान करता है. प्रभु जगन्नाथ की महिमा सर्वव्यापी है और उनकी आस्था देश-विदेश में अनगिनत श्रद्धालुओं के हृदय में बसी है. रथ यात्रा की परंपरा ओडिशा और झारखंड सहित पूरे भारत की आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने वाली पावन कड़ी है जगन्नाथ मंदिर से शुरू होने वाली विश्वविख्यात रथ यात्रा जहां आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक है वहीं रांची, जमशेदपुर सहित झारखंड के विभिन्न हिस्सों में भी यह उत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है. यह पर्व संदेश देता है कि आस्था सीमाओं से बंधा हुआ नहीं है. बल्कि समाज को जोड़ती है. 
ट्रस्ट के माध्यम अभूतपूर्व और भव्य केंद्र उभरकर आएगा- CM हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि देश दुनिया में कई ऐसी संस्थाओं का निर्माण होता है जहां अलग-अलग उद्देश्य और विचारों के साथ चीज़ें स्थापित की जाती है जहां हम मानव जीवन को तलाशते हैं इसी कड़ी आज एक सामाजिक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक समन्वय के जीवन केंद्रित स्थापित करने का नींव रखा गया है. पूरी उम्मीद है कि ट्रस्ट के माध्यम से यहां अभूतपूर्व और भव्य केंद्र के साथ उभरकर आएगा. जो हम सभी के लिए प्रेरणादायक हो. इसके लिए ट्रस्ट के सभी सदस्यों को शुक्रिया और आभार.








