Jharkhand (Ranchi): झारखंड विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आज कई अहम मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिली. एयर एम्बुलेंस सेवा को एक्सटेंशन देने से लेकर पेयजल संकट और विस्थापितों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा.
चतरा एयर एंबुलेंस क्रैस से उठा था सुरक्षा का मुद्दा
सबसे पहले सदन में एयर एम्बुलेंस सेवा का मुद्दा उठा. विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने रेड बर्ड एयर एम्बुलेंस सर्विस को एक्सटेंशन देने पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा कि क्या सरकार खुद का चार्टर्ड हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बना रही है. इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने जवाब देते हुए कहा कि तकनीकी रूप से सरकार के लिए अपना चार्टर्ड हेलीकॉप्टर खरीदना संभव नहीं है.
इरफान अंसारी ने जताया पीड़ित परिवारों को मुआवजा का भरोसा
वहीं मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि फिलहाल इस मामले को मुख्यमंत्री की ओर से होल्ड पर रखा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि चतरा में रेड बर्ड एयर एम्बुलेंस विमान हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनके प्रति सरकार गंभीर है और बहुत जल्द मुआवजा दिया जाएगा.
"सरकार के पास होना चाहिए खुद का एयर एंबुलेंस"
इस दौरान विधायक नवीन जायसवाल ने भी सवाल उठाया कि सरकार एक वित्तीय वर्ष में चार्टर्ड एयर एम्बुलेंस हेलीकॉप्टर को किराए पर लेने में कितना खर्च करती है और क्या इतने खर्च में सरकार खुद का विमान नहीं खरीद सकती. हालांकि विधायक के सिंह ने कहा कि उनके अनुभव के आधार पर किराए पर सेवा लेना ही ज्यादा व्यवहारिक है.
JMM विधायक अपने चापाकल की मांग पर हुए भावुक
इसी बीच सदन में पेयजल संकट का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा. जेएमएम विधायक अनंत प्रताप देव अपने ही सरकार के सामने चापाकल की मांग को लेकर भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान उनके क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत है और लोग चापाकल की मांग कर रहे हैं. अगर विभाग की ओर से चापाकल उपलब्ध नहीं कराया गया तो गर्मी में लोगों को पानी पिलाना मुश्किल हो जाएगा.
मंत्री योगेंद्र प्रसाद का जवाब
इस पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने जवाब देते हुए कहा कि बजट आवंटन होने के बाद ही चापाकल की स्वीकृति दी जा सकेगी. फिलहाल विभाग की ओर से सर्वे का काम कराया जा रहा है. हालांकि मंत्री के जवाब से अनंत प्रताप देव संतुष्ट नजर नहीं आए.
नवीन जयसवाल ने उठाया विस्थापितों का मुद्दा
सदन में विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा भी उठा. विधायक नवीन जायसवाल ने रांची जिले के तिरिल और खुटियानी जैसे गांवों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन गांवों के विस्थापितों के लिए छह वर्ष पहले ही करीब 400 मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन आज तक उनका पुनर्वास नहीं कराया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति पूरी तरह फेल साबित हो रही है.
निजी कंपनी के माध्यम से कराया गया विस्थापितों का सत्यापन
इस पर जवाब देते हुए संबंधित विभाग के मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि एक निजी कंपनी के माध्यम से पहले विस्थापितों का सत्यापन कराया गया था. अब सरकार नए सिरे से सत्यापन की प्रक्रिया करवा रही है और जल्द ही विस्थापितों के पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. हालांकि इस जवाब से विधायक नवीन जायसवाल संतुष्ट नहीं दिखे.
सदन में इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
रिपोर्ट: नवीन शर्मा






