डिक्की ने खोल दिया ‘लूट’ का राज? जांच में सामने आया ऐसा सच, SP ने थानाध्यक्ष से मांगा जवाब
मोतिहारी के संग्रामपुर लूटकांड में पुलिस जांच के दौरान बाइक की डिक्की सही मिलने और बयान व आवेदन में अंतर सामने आने से मामला संदिग्ध हो गया है। वहीं आवेदन मिलने को लेकर थानाध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठने के बाद SP ने स्पष्टीकरण मांगा है।


मोतिहारी: संग्रामपुर थाना क्षेत्र में सामने आए कथित लूटकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की कहानी पर सवाल भी बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस जांच में बाइक की डिक्की सही मिली, जबकि पीड़ित के आवेदन में डिक्की तोड़े जाने की बात कही गई है। इसके अलावा घटना के समय दिए गए बयान और बाद में दिए गए आवेदन में भी अंतर सामने आने की बात पुलिस जांच में कही जा रही है। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस फिलहाल घटना कोप्रथमदृष्टया संदिग्ध मानकर जांच कर रही है। वहीं, इस पूरे मामले में संग्रामपुर थानाध्यक्ष की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस अधीक्षक ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
आवेदन में डिक्की तोड़ने की बात, जांच में मिली सही
जानकारी के मुताबिक, संग्रामपुर बाजार स्थित मस्जिद के पास स्वर्ण आभूषण बनाने वाले कारीगर विक्की कुमार दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। उनके आवेदन के अनुसार, इसी दौरान बाइक सवार अज्ञात अपराधियों ने हथियार के बल पर उन्हें रोककर कथित तौर पर लूटपाट की। आवेदन में बाइक की डिक्की तोड़े जाने का भी उल्लेख किया गया था। लेकिन पुलिस की जांच के दौरान बाइक की डिक्की टूटी हुई नहीं मिली।
यही नहीं, पुलिस के अनुसार घटना के वक्त दिए गए बयान और बाद में दिए गए लिखित आवेदन में भी अंतर सामने आया है। इन बिंदुओं ने जांच को और पेचीदा कर दिया है।
लूट की कहानी से ज्यादा अब थाने की कार्रवाई पर सवाल
मामले में दूसरा बड़ा सवाल पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि पीड़ित ने थाने में आवेदन दिया था, लेकिन थानाध्यक्ष की ओर से वरीय अधिकारियों को बताया गया कि उन्हें कोई आवेदन मिला ही नहीं।
अब सवाल यह है कि यदि आवेदन वास्तव में थाने में दिया गया था, तो उसे दर्ज करने या उसकी जांच की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? और यदि आवेदन नहीं मिला था, तो पीड़ित के दावे की जांच किए बिना वरीय अधिकारियों को ऐसी जानकारी क्यों दी गई? मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने संग्रामपुर थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। अब थानाध्यक्ष के जवाब पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
अब जांच के बाद खुलेगा पूरा राज
पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संग्रामपुर थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। अब थानाध्यक्ष के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस कथित लूट की घटना के साथ-साथ पीड़ित के आवेदन, उसके बयान और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। एक तरफ पुलिस जांच में घटना संदिग्ध बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आवेदन मिलने या नहीं मिलने को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में लूट की घटना हुई थी या मामला कुछ और था।
(मोतिहारी से प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)

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