जब पूरी परीक्षा ही रद्द तो मेरिट लिस्ट की चुनौती कैसी?, JPSC मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ज्यूडिशियल सर्विस सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।


JPSC Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ज्यूडिशियल सर्विस सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पूरी प्रारंभिक परीक्षा को ही पहले रद्द किए जाने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस याचिका को पूरी तरह निष्प्रभावी (निरर्थक) माना और मामले का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया।
CJI की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया फैसला
शनिवार को यह अहम सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई की शुरुआत में ही याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने पीठ को अवगत कराया कि झारखंड सरकार ने संबंधित भर्ती की पूरी प्रारंभिक परीक्षा को ही आधिकारिक रूप से रद्द करने का निर्णय ले लिया है। इस जानकारी के रिकॉर्ड पर आते ही खंडपीठ ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि जब मूल परीक्षा ही अस्तित्व में नहीं रही और निरस्त हो चुकी है, तो संशोधित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने या उस पर बहस करने का अब कोई कानूनी औचित्य शेष नहीं बचता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह याचिका को खारिज (Dismiss) नहीं कर रही है, बल्कि प्रभावहीन (Infructuous) मानते हुए इसका औपचारिक निस्तारण कर रही है।
विज्ञापन संख्या 22/2023 के तहत 138 पदों पर निकली थी बहाली
यह पूरा विवाद JPSC के विज्ञापन संख्या 22/2023 के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के कुल 138 पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। आयोग द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जारी की गई उत्तर कुंजी (Answer Key) को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिसके बाद आयोग ने लगातार तीन बार उत्तर कुंजी में संशोधन किया। अंततः 13 मई 2024 को तीसरी संशोधित आंसर-की जारी की गई और इसके आधार पर 2 जुलाई 2024 को परिणाम घोषित करते हुए कुल 1,797 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया।
हाईकोर्ट के आदेश से बाहर हुए थे 35 अभ्यर्थी, पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
प्रारंभिक परीक्षा परिणाम के बाद करीब 184 अभ्यर्थी अगले चरण की औपचारिक प्रक्रिया में शामिल भी हो चुके थे। इसी बीच तीन विवादास्पद प्रश्नों के उत्तर को लेकर मामला झारखंड High Court पहुंच गया। High Court ने तीनों उत्तरों को त्रुटिपूर्ण पाते हुए अंकों की पुनर्गणना करने और बिल्कुल नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया। High Court के इस निर्देश का पालन करते हुए जब आयोग ने नई संशोधित सूची तैयार की, तो पूर्व में सफल घोषित किए गए 35 अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए। इस परिणाम से असंतुष्ट होकर बाहर हुए अभ्यर्थियों ने न्याय की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अब परीक्षा रद्द होने के आधार पर निस्तारित कर दिया गया है।

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