'4.5 लाख की घूस मांगी, 50 हजार लेते पकड़ी गईं!', खूंटी महिला थाना की पूर्व थानेदार सुलेखा कुमारी की जमानत खारिज
केस में राहत दिलाने और कानूनी मदद के बदले 4.50 लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगने और पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ी गईं खूंटी महिला थाना की पूर्व प्रभारी सुलेखा कुमारी (सपना) को अदालत से बड़ा झटका लगा है।


Ranchi: केस में राहत दिलाने और कानूनी मदद के बदले 4.50 लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगने और पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ी गईं खूंटी महिला थाना की पूर्व प्रभारी सुलेखा कुमारी (सपना) को अदालत से बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता और भ्रष्टाचार के पुख्ता साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी महिला पुलिस अधिकारी की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी पूर्व थानेदार को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
केस से नाम हटाने और मदद के बदले मांगी थी 4.50 लाख की रिश्वत
यह पूरा मामला खूंटी जिले के हुरलुंग निवासी श्याम कुमार की लिखित शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता श्याम कुमार के खिलाफ खूंटी महिला थाने में एक मामला दर्ज था। इस केस की जांच में सहयोग करने, कानूनी कार्रवाई में राहत देने और मदद पहुंचाने के बदले तत्कालीन महिला थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी सपना ने कुल 4.50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 50 हजार रुपये का नकद भुगतान करने पर सहमति बनी थी।
ACB ने गोपनीय जांच के बाद बिछाया जाल, 50 हजार नकद लेते दबोचा
शिकायतकर्ता श्याम कुमार ने रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की सूचना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दे दी। ACB की विशेष टीम ने अत्यंत गोपनीय तरीके से शिकायत का प्रारंभिक सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात पूरी तरह सच पाई गई। इसके बाद 30 जुलाई को योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर ACB की टीम ने आरोपी महिला थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी को शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये नकद लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को देखते हुए अदालत ने नहीं दी कोई राहत
गिरफ्तारी के बाद ACB ने सुलेखा कुमारी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। जेल में रहने के दौरान बचाव पक्ष की ओर से नियमित जमानत के लिए विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ट्रैप की कार्रवाई और घूसखोरी से जुड़े ठोस सबूत पेश करते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पद का दुरुपयोग करने और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

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