'सिस्टम में खराबी का मतलब नुकसान नहीं!, HDFC Securities के खिलाफ 4.5 लाख का क्लेम खारिज, उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला
पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के दौरान तकनीकी खराबी के चलते 4.50 लाख रुपये के कथित आर्थिक नुकसान के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।


Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के दौरान तकनीकी खराबी के चलते 4.50 लाख रुपये के कथित आर्थिक नुकसान के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। HDFC Securities Limited के खिलाफ दायर शिकायत पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में केवल तकनीकी समस्या आ जाने भर से किसी निवेशक का वास्तविक आर्थिक नुकसान साबित नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि उपभोक्ता को यह ठोस रूप से साबित करना होता है कि तकनीकी खराबी के दौरान वास्तव में कौन सा ऑर्डर विफल हुआ और उससे कितना प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान पहुंचा।
नखासा निवासी ने 4.90 लाख के मुआवजे की लगाई थी गुहार
यह पूरा मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के नखासा गांव निवासी सुशील कुमार हेम्ब्रम से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में CC केस संख्या 14/2025 के तहत HDFC Securities के खिलाफ याचिका दायर की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि 3 अक्टूबर 2024 को कंपनी के ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और टेलीफोन हेल्पलाइन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण वे समय पर अपने शेयर और ऑप्शन अनुबंध नहीं बेच सके। इसके चलते उन्हें करीब 4.50 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कथित आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना और मुकदमा खर्च जोड़कर कुल 4.90 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
संभावित मुनाफे की तुलना वास्तविक नुकसान से नहीं की जा सकती
मामले की सुनवाई के दौरान HDFC Securities ने स्वीकार किया कि 3 अक्टूबर 2024 को सुबह 11:45 से दोपहर 2:25 के बीच NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के फ्यूचर ट्रेडिंग ऑर्डर में कुछ तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन इससे शिकायतकर्ता के 4.50 लाख रुपये के कथित नुकसान की पुष्टि नहीं होती। आयोग ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता यह प्रमाणित करने में विफल रहे कि उस समय उन्होंने किस दर पर कौन सा ऑर्डर प्लेस करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने साफ टिप्पणी की कि बाद में ऑप्शन ट्रेडिंग में कई गुना मुनाफा कमाने की संभावना केवल एक अनुमान है और किसी संभावित लाभ को वास्तविक आर्थिक क्षति नहीं माना जा सकता।
F&O ट्रेडर 'उपभोक्ता' की श्रेणी में नहीं
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 'श्रीकांत जी. मंत्री बनाम पंजाब नेशनल बैंक' वाद का हवाला दिया। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता नियमित रूप से फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) जैसे सट्टेबाजी व उच्च जोखिम वाले व्यावसायिक कारोबार में शामिल थे और ब्रोकरेज सेवा का उपयोग व्यक्तिगत उपभोग के बजाय विशुद्ध व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से कर रहे थे। इसके आधार पर अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(7) के तहत 'उपभोक्ता' के दायरे में नहीं आते हैं और याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया कि निवेशक प्रतिभूति बाजार के अन्य सक्षम नियामकीय या मध्यस्थता मंचों पर जाने के लिए स्वतंत्र हैं।

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