एनजीटी प्रतिबंध से पहले रेत सिंडिकेट सक्रिय, नर्मदा का सीना छलनी… प्रशासन पर संरक्षण के आरोप
नक्षत्र न्यूज की टीम जब मौके पर पहुंची तो नर्मदा घाटों पर भारी मशीनों से खुलेआम खुदाई होती मिली. मशीनों के पंजे नर्मदा नदी का सीना चीरते नजर आए, जबकि नियम-कायदों को ताक पर रखकर रेत ठेकेदार और सिंडिकेट अपनी मनमानी करते दिखाई दिए.

Raisen, MP: रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र में नर्मदा नदी एक बार फिर रेत माफियाओं की बेलगाम लूट का केंद्र बनती जा रही है. गौरा-मछवाई रेत खदान कागजों में भले ही बंद दर्शाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. यहां दिन-रात सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, जेसीबी और लोडर मशीनों के जरिए रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन युद्ध स्तर पर जारी है.
भारी मशीनें... खुलेआम खुदाई
नक्षत्र न्यूज की टीम जब मौके पर पहुंची तो नर्मदा घाटों पर भारी मशीनों से खुलेआम खुदाई होती मिली. मशीनों के पंजे नर्मदा नदी का सीना चीरते नजर आए, जबकि नियम-कायदों को ताक पर रखकर रेत ठेकेदार और सिंडिकेट अपनी मनमानी करते दिखाई दिए. स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं हो सकता.
कारोबार लंबे समय तक जारी रखने की अवैध योजना
सबसे बड़ा खुलासा यह सामने आ रहा है कि रेत सिंडिकेट द्वारा एनजीटी के संभावित प्रतिबंध से पहले हजारों ट्रक रेत का भंडारण और परिवहन करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं. सूत्रों के अनुसार माफिया दिन-रात तेजी से रेत निकालकर अलग-अलग स्थानों पर डंपिंग कर रहे हैं, ताकि प्रतिबंध लगने के बाद भी अवैध कारोबार लंबे समय तक जारी रखा जा सके. यही कारण है कि घाटों पर लगातार भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ती जा रही है.
निरंतर बढ़ रहा नदी किनारे का कटाव
ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही नर्मदा घाटों पर अवैध उत्खनन का खेल और तेज हो जाता है. कई स्थानों पर मशीनों से गहराई तक खुदाई की जा रही है, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप को भारी नुकसान पहुंच रहा है. लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से नदी किनारों का कटाव बढ़ रहा है, जलस्तर प्रभावित हो रहा है और आसपास की कृषि भूमि पर भी खतरा मंडराने लगा है.
कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाए हैं कि प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों और औपचारिक छापेमारी तक सीमित है. जमीन पर रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम शासन के आदेशों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब खदान बंद है तो आखिर रोजाना सैकड़ों घनमीटर रेत कहां से निकल रही है और किसकी अनुमति से उसका परिवहन हो रहा है?
करोड़ों के राजस्व का नुकसान
रेत के इस काले कारोबार से शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन बने हुए हैं. इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से मांग की है कि गौरा-मछवाई रेत खदान और नर्मदा घाटों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही अवैध उत्खनन, परिवहन और रेत सिंडिकेट को संरक्षण देने वालों पर कठोर कार्रवाई कर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि नर्मदा नदी को विनाश से बचाया जा सके.
(रायसेन से जीतमल जैन की रिपोर्ट)
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

मध्यप्रदेश में 3 MBBS फर्जी डॉक्टरों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, सरकारी नौकरी में दे रहे थे सेवाएं

MP: डायल-112 के जवानों की जांबाजी; 3 किलोमीटर दौड़कर रेलवे ट्रैक पर सुसाइड करने जा रहे किशोर को बचाया







