महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे के समर्थन में लगे नारे, ग्वालियर में प्रशासन अलर्ट
महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथुराम ने भरी सभा के बीच कर दी थी. जिसके 78 साल गुजर जाने के बावजूद कई हिंदूवादी संगठन हत्यारे की पूजा किया करता है.

शाम करीब सवा पांच बजे, तारीख 30 जनवरी 1948, यह दिन भारतीय इतिहास में काले अक्षरों से अंकित है. सिर्फ इसलिए नहीं कि एक कट्टरपंथी आतंकवादी ने महात्मा गांधी की निर्मम हत्या कर दी थी. बल्कि इसलिए भी कि निहत्थे और सबके प्रति हृदय में प्रेम रखने वाले गांधीजी के सीने पर गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था; और मारने वाला इसी भारत देश का एक कट्टरपंथी समूह से जुड़ा युवक था- जिसे नाथुराम गोडसे के नाम से जाना जाता है. गांधीजी की हत्या के 78 साल बीत जाने के बाद भी आज भारत में कई हिंदूवादी संगठन नाथुराम को आतंकवादी मानने से इनकार करते हैं.
ग्वालियर में मनाई जा रही हत्यारे गोडसे की जयंती
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आज यानी 19 मई को बापू के हत्यारे नाथुराम गोडसे की जयंती मनाई जा रही है. गोडसे का महिमामंडन कोई नई बात नहीं है. राजनीतिक पार्टियां अपने वोट बैंक मजबूत करने के लिए इस तरह के हथकंडे समय-समय पर आजमाती रहती हैं.
लगाए जा रहे "अमर रहे" के नारे
ग्वालियर के दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा कार्यालय में मंगलवार को नाथूराम गोडसे की 116वीं जयंती पर कार्यक्रम हुआ. यहां संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गोडसे की तस्वीर पर माल्यार्पण किया. साथ ही नाथुराम गोडसे अमर रहे जैसे नारे भी लगाए गए.
कार्यक्रम में दिए गए कई विवादित बयान
हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं द्वारा नाथुराम गोडसे के समर्थन में कई विवादित बयान दिए गए. उन्होंने कहा कि नाथुराम ने महात्मा गांधी की हत्या नहीं की थी बल्कि उनका 'वध' किया था. साथ ही उन्होंने नाथुराम की मूर्तियां पूरे देश में लगाए जाने की केंद्र सरकार से मांग भी की.
अलर्ट मोड पर था प्रशासन
ग्वालियर प्रशासन ने भारी मात्रा में हिंदू महासभा के कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात कर रखे थे, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो पाए. गौरतलब है कि पहले भी नाथुराम के समर्थन में ऐसे कार्यक्रम होते रहे हैं. जिसमें शामिल कट्टरपंथी विचारों वाले संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा भड़काऊ भाषण दिए गए हैं. ग्वालियर में वर्ष 2017 में हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यालय में नाथुराम की प्रतिमा स्थापित कर भवन को मंदिर का रूप देने की कोशिश की थी. जिसके बाद प्रतिमा को प्रशासन द्वारा जब्त कर लिया गया था. इसके अलावा भी कई ऐसे उदारहण हैं जिनमें उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित देश के कई अन्य हिस्सों में हत्यारे गोडसे का मंदिर बनाने की हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने कोशिश की थी. एक घटना अलिगढ़ में 2019 की है, जब महात्मा गांधी के पुतले जलाए गए थे और उसपर सांकेतिक गोलीबारी भी की गई थी.
गोडसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख
साल 2017-18 में 'अभिनव भारत' संगठन के शोधकर्ता पंकज फड़नीस ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी. याचिका में दावा किया गया था कि गांधी जी की हत्या में गोडसे के अलावा एक "चौथा बुलेट" (फोर्थ बुलेट थ्योरी) भी था, जो किसी तीसरे व्यक्ति (ब्रिटिश खुफिया एजेंसी) द्वारा दागा गया था, इसलिए मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस थ्योरी को पूरी तरह से काल्पनिक और आधारहीन बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दशकों पुरानी ऐतिहासिक और कानूनी रूप से बंद हो चुकी घटना को "सिर्फ अनुमानों के आधार पर" दोबारा नहीं खोला जा सकता.
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