रांची सदर अस्पताल बना आवारा कुत्तों का पार्क, मरीजों की हालत ख़राब!!
रांची सदर अस्पताल आवारा कुत्तों का पार्क बन गया है क्योंकि गली मोहल्लों की तरह आवारा कुत्ते सदर अस्पताल में बेखौफ घूम रहे है । लेकिन इलाज के लिए आज मरीजों के मन में खौफ बना हुआ है । छोटे बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरा इन आवारा कुत्तों का है । सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन।

Jharkhand (Ranchi): राजधानी रांची के सबसे चर्चित सदर अस्पताल में लगातार मरीजों का लोड बढ़ रहा है। खास कर की डॉग बाइट के मरीज़ वैक्सीन के लिए सदर अस्पताल ही आते है। सदर अस्पताल अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं के कारण हर रोज नए आयाम तय कर रहा है । लेकिन इस अस्पताल से ही एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो अपने आप में चौंकाने वाली है। गली मोहल्लों में तो आपने आवारा कुत्तों को घूमते देखा होगा लेकिन अस्पताल के इमरजेंसी के पास ऐसा शायद ही दिखा होगा । लेकिन यह रांची के सदर अस्पताल में मुमकिन हो गया है ।

अस्पताल में ही कुत्तों के आतंक का ख़ौफ़
सदर अस्पताल में कुत्ते के आतंक का शिकार हुए मरीज वैक्सीन लगवाने आते है और अस्पताल के अंदर ही कुत्ते को देख घबरा जाते है। यह नया मामला नहीं है, लंबे समय से कुत्ते सदर अस्पताल के अंदर ही घूमते है और लोगों को डराते है । सदर अस्पताल में कई तरह के मरीज इलाज के लिए आते है और कई लोगों में कुत्तों का डर काफी ज़्यादा रहता है तो उनके लिए अब सावधान होना बेहद जरूरी है। छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा इन आवारा कुत्तों से खतरा है लेकिन प्रबंधन आंखें बंद किए हुए है।
हर दिन डॉग बाइट के 200 केस
राजधानी में कुत्तों का आतंक जारी है। हर दिन ये आवारा कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर दिन केवल सदर हॉस्पिटल में डॉग बाइट के 150 से अधिक मामले आ रहे है। इतनी संख्या में लोग एंटी रेबीज का वैक्सीन लगवा रहे है। वहीं प्राइवेट में वैक्सीन लगवाने का भी आंकड़ा अलग है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश
देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कई अहम निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई महीनों तक सुनवाई हुई थी।सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए थे कि राज्य में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था हो। राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों तथा अस्पतालों की पहचान करनी थी जहां आवारा पशु और कुत्ते घूमते हैं। इन परिसरों में बाड़ लगाने और रखरखाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया था।
वही नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को तीन महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण करने को कहा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस डिपो, स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 24 घंटे मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन उपलब्ध कराने को कहा गया था। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को चार सप्ताह में SOP जारी करने का आदेश दिया गया था।
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