पेन किलर के पास कोई GPS नहीं!, फिर भी दर्द वाली जगह पर कैसे देती है राहत?
सिर में तेज दर्द हो, पैर में चोट लगी हो या शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो—ऐसे में पेन किलर लेने के बाद अक्सर राहत मिलने लगती है।


Health News: सिर में तेज दर्द हो, पैर में चोट लगी हो या शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो—ऐसे में पेन किलर लेने के बाद अक्सर राहत मिलने लगती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक गोली को आखिर कैसे पता चलता है कि दर्द सिर में है, पेट में है या पैर में?
इसका जवाब काफी दिलचस्प है। सच यह है कि पेन किलर को दर्द की जगह का पता नहीं होता। दवा शरीर में पहुंचने के बाद खून के जरिए अलग-अलग हिस्सों तक फैलती है और अपने काम करने के तरीके के अनुसार दर्द से जुड़े केमिकल या सिग्नल को प्रभावित करती है।
चोट लगने पर शरीर में आखिर होता क्या है?
जब शरीर के किसी हिस्से में चोट लगती है, सूजन होती है या ऊतक को नुकसान पहुंचता है, तो शरीर कई तरह के रासायनिक संदेश भेजता है। इनमें प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandins) जैसे पदार्थ अहम भूमिका निभाते हैं।
ये पदार्थ दर्द महसूस करने वाली नसों को ज्यादा संवेदनशील बना सकते हैं। इसके बाद नसें दिमाग तक सिग्नल भेजती हैं और हमें दर्द महसूस होता है।
दर्द वास्तव में शरीर का एक तरह का अलार्म सिस्टम भी है, जो हमें संकेत देता है कि शरीर के किसी हिस्से में समस्या है और उसे आराम या इलाज की जरूरत हो सकती है।
गोली खाने के बाद दवा कहां जाती है?
जब हम पेन किलर खाते हैं तो उसका सक्रिय तत्व पेट और आंतों से अवशोषित होकर खून में पहुंचता है। इसके बाद रक्त प्रवाह उसे शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाता है।
यानी दवा को यह पता लगाने की जरूरत नहीं पड़ती कि दर्द कहां है। वह पूरे शरीर में पहुंचती है और जहां उसके असर से जुड़े दर्द या सूजन वाले रासायनिक रास्ते सक्रिय होते हैं, वहां उसका प्रभाव महसूस हो सकता है।
फिर राहत सिर्फ दर्द वाली जगह पर ही क्यों महसूस होती है?
जिस हिस्से में चोट या सूजन होती है, वहां दर्द और सूजन से जुड़े रासायनिक बदलाव ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं। कुछ पेन किलर इन प्रक्रियाओं को कम करने में मदद करती हैं।
इसलिए, भले ही दवा खून के जरिए शरीर के कई हिस्सों तक पहुंचती है, राहत उस जगह ज्यादा महसूस होती है जहां दर्द पैदा करने वाली प्रक्रिया सक्रिय होती है।
हर पेन किलर एक जैसे काम नहीं करती
अलग-अलग पेन किलर के काम करने का तरीका भी अलग हो सकता है।
कुछ दवाएं प्रोस्टाग्लैंडिन बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है। वहीं कुछ दवाएं दिमाग और नसों के जरिए दर्द को महसूस करने की प्रक्रिया पर असर डालती हैं।
इसी वजह से हर तरह के दर्द के लिए एक ही पेन किलर सही नहीं होती। सिरदर्द, चोट, सूजन या अन्य प्रकार के दर्द में डॉक्टर अलग दवा की सलाह दे सकते हैं।
दवा का असर कितनी देर में शुरू होता है?
यह दवा के प्रकार, उसकी मात्रा, खाली या भरे पेट और व्यक्ति के शरीर पर निर्भर करता है। कई आम दर्द निवारक दवाओं का असर कुछ समय बाद शुरू हो सकता है, लेकिन हर दवा में यह समय एक जैसा नहीं होता।
बार-बार पेन किलर लेना पड़ सकता है भारी
पेन किलर से राहत मिल सकती है, लेकिन इन्हें बार-बार या जरूरत से ज्यादा लेना सुरक्षित नहीं है। कुछ दर्द निवारक दवाएं ज्यादा या लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर पेट, किडनी, लिवर और अन्य अंगों पर असर डाल सकती हैं।
इसलिए बिना जरूरत बार-बार पेन किलर लेने से बचें और दवा की मात्रा व इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर या योग्य फार्मासिस्ट की सलाह जरूर लें।

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