बिहार में अब रेफर करना आसान नहीं! बिहार में 15 अगस्त से नया Referral Rule लागू
बिहार में 15 अगस्त 2026 से नई रेफरल नीति लागू हो रही है। अब जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों से मरीजों को PMCH, NMCH और IGIMS जैसे बड़े अस्पतालों में भेजने के लिए स्पष्ट चिकित्सीय कारण बताना होगा। रेफरल से पहले मरीज को स्थिर करना और पूरी जानकारी भाव्या पोर्टल पर दर्ज करना भी जरूरी होगा।


पटना: 15 अगस्त 2026 से बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए व्यवस्था बदल रही है। अब जिला या अनुमंडलीय अस्पताल से किसी मरीज को सीधे PMCH, NMCH या IGIMS जैसे बड़े अस्पतालों में भेज देना या रेफेर कर देना इतना आसान नहीं होगा। सरकार ने नई रेफरल नीति लागू कर दी है, जिसके तहत डॉक्टरों को मरीज को रेफर करने की वजह साफ-साफ बतानी होगी।
इस बदलाव के पीछे सरकार की सोच सीधी है- हर मरीज को पटना भेजने के बजाय जहां तक संभव हो, उसका इलाज उसी जिले में किया जाए।इससे बड़े अस्पतालों में लगने वाली भीड़ कम होगी और गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
पहले मरीज का इलाज, फिर होगा रेफर
नई व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को सिर्फ यह कहकर मरीज को बड़े अस्पताल भेजने की छूट नहीं होगी कि यहां इलाज की सुविधा नहीं है। अगर मरीज की हालत गंभीर है और उसे दूसरे अस्पताल भेजना जरूरी है, तो पहले उसकी स्थिति को स्थिर करना होगा। इसके बाद ही दूसरे अस्पताल में रेफरल किया जाएगा।
रेफर करते समय डॉक्टर को यह भी बताना होगा कि मरीज को आखिर किस चिकित्सीय कारण से दूसरे अस्पताल भेजा जा रहा है। बिना पर्याप्त वजह सामान्य मरीजों को बड़े अस्पताल रेफर करने पर संबंधित डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
रेफरल की पूरी जानकारी होगी ऑनलाइन
इस नई नीति में सबसे बड़ी बात ये होगी कि अब रेफरल की पूरी प्रक्रिया सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। मरीज के इलाज और रेफर किए जाने से जुड़ी जानकारी भाव्या डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इसमें मरीज को क्या उपचार दिया गया, उसकी स्थिति कैसी थी और उसे आगे भेजने की जरूरत क्यों पड़ी, इन सबकी जानकारी रिकॉर्ड की जाएगी। मरीज या उसके परिजनों को भी उपचार और रेफरल से संबंधित रिकॉर्ड की कंप्यूटरीकृत कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।
रेफर किए गए मरीजों को अस्पताल बदलने के लिए अब सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था भी अनिवार्य हो गई है। खासकर गंभीर मरीजों के मामले में इसका महत्व ज्यादा है। अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचने के दौरान मरीज को परिवहन की परेशानी न हो, इसी वजह से सरकारी एंबुलेंस के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। सरकार का मकसद सिर्फ रेफरल रोकना नहीं है। इसके लिए जिला अस्पतालों की सुविधाएं बढ़ाने की भी तैयारी है।
राज्य के 36 जिला अस्पतालों में 70 तरह की सर्जरी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की सुविधाएं भी 24 घंटे उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। ब्लड टेस्ट से लेकर MRI जैसी जांच अगर जिला स्तर पर ही समय पर हो जाएं, तो डॉक्टरों को इलाज का फैसला लेने में आसानी होगी और मरीजों को हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए पटना जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
असली परीक्षा अब जमीन पर होगी
जिन जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां दूसरे अस्पतालों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं रोटेशन के आधार पर लेने की योजना है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने की वजह से मरीजों को बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की तरफ भेजने की जरूरत कम होगी। बिहार में हर साल बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए PMCH, NMCH और IGIMS जैसे बड़े अस्पतालों का रुख करते हैं। इनमें ऐसे मरीज भी होते हैं, जिनका इलाज जिला स्तर पर ही संभव हो सकता है। ये नई नीति इसी तस्वीर को बदलने की कोशिश है।
नई नीति आज से लागू हो गई है। अब देखना यह होगा कि कागज पर तैयार यह नया रेफरल सिस्टम अस्पतालों की जमीन पर मरीजों के लिए कितनी राहत लेकर आता है।

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.









