शर्मनाक!, सुदिव्य सोनू की मौत के बाद Telegram ग्रुप में ‘जश्न’ जैसे कमेंट?, स्क्रीनशॉट वायरल
झारखंड सरकार के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद एक बेहद अप्रिय और शर्मनाक विवाद खड़ा हो गया है।
Ranchi: झारखंड सरकार के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद एक बेहद अप्रिय और शर्मनाक विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले Telegram ग्रुप्स में दिवंगत नेता की मौत को लेकर कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक, भद्दी और संवेदनहीन टिप्पणियां किए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे कई विवादित चैट के स्क्रीनशॉट अब फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर आम यूजर्स और समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
'JPSC JSSC रिफॉर्म मंच' के चैट स्क्रीनशॉट से बवाल
वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स में मुख्य रूप से ‘JPSC JSSC REFORM MANCH’ और ‘JPSC/JSSC न्याय मंच’ नाम के जाने-माने Telegram ग्रुप्स के इंटरफेस नजर आ रहे हैं। एक स्क्रीनशॉट में स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू की तस्वीर साझा करते हुए उनकी मौत पर बेहद असंवेदनशील और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। इसके जवाब में ग्रुप के कुछ अन्य सदस्यों ने भी आपत्तिजनक प्रतिक्रियाएं दी हैं। वहीं एक दूसरे स्क्रीनशॉट में पूर्व मंत्री के खिलाफ पहले हुई कार्रवाइयों का हवाला देते हुए कड़वाहट भरी बातें कही गई हैं, जिसको लेकर अब सोशल मीडिया पर जोरदार बहस छिड़ गई है।
'विरोध अपनी जगह, पर मौत का मजाक उड़ाना कहां तक सही?'
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने आंदोलनकारी छात्रों और संबंधित मंचों को जमकर आड़े हाथों लिया है। यूजर्स ने सीधे मंच को टैग करते हुए सवाल दागे हैं कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों या किसी राजनेता के फैसलों का कड़ा विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के इस दुनिया से चले जाने के बाद उसके लिए ऐसी अमर्यादित और जहरीली भाषा का इस्तेमाल करना किस हद तक जायज है। लोगों का कहना है कि किसी की चिता की आग ठंडी होने से पहले ऐसी भाषा का इस्तेमाल समाज के गिरते मानसिक स्तर को दर्शाता है।
'कल के भावी अफसरों से ऐसी घटिया सोच की उम्मीद नहीं'
वायरल पोस्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कई प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता जाहिर की है कि JPSC और JSSC जैसी उच्च स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा ही कल जाकर सरकारी तंत्र में अफसर बनेंगे। अगर राज्य की कमान संभालने का सपना देखने वाले नौजवानों की सोच इतनी असंवेदनशील होगी, तो वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएंगे। लोगों ने दो टूक कहा कि विचारों में लाख असहमति हो सकती है, लेकिन गाली-गलौज, चरित्र हनन और किसी की मौत का जश्न मनाना कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता।
मार्गदर्शकों और ग्रुप एडमिन की चुप्पी पर भी उठे सवाल
सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के घेरे में छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख चेहरे जैसे प्रकाश पोद्दार और कुणाल प्रताप का नाम भी घसीटा जा रहा है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या छात्रों का मार्गदर्शन करने वाले लोग ऐसे नफरती कमेंट्स करने वालों को टोक रहे हैं या मौन रहकर उनका समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, वायरल स्क्रीनशॉट में दिख रहे कमेंट्स किस विशिष्ट व्यक्ति ने लिखे हैं, उनकी सत्यता क्या है और पूरी बातचीत का संदर्भ क्या था, इसकी कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में यह पूरा मामला फिलहाल दावों और आरोपों के बीच ही घूम रहा है, लेकिन इसने छात्र आंदोलनों की गरिमा पर एक बड़ा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
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