एक नेत्रदान और दो लोगों की जिंदगी में रौशनी..., रांची की छात्राओं ने कैनवास पर उकेरा महादान का संदेश
रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट स्कूल में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े पर पेंटिंग प्रतियोगिता और जागरूकता सेमिनार हुआ। विशेषज्ञों ने नेत्रदान की प्रक्रिया, भ्रांतियों और कॉर्निया प्रत्यारोपण की जानकारी दी।

Ranchi: 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर राजधानी रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट स्कूल में छात्राओं के बीच पेंटिंग प्रतियोगिता और एक विशेष नेत्रदान जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस प्रेरक कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड, कश्यप मेमोरियल आई बैंक और आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उर्सलाइन कॉन्वेंट की सैकड़ों छात्राओं ने अपनी कल्पना और रंगों के जरिए कैनवास पर नेत्रदान के महत्व को उकेरा और समाज से इस महादान के लिए आगे आने की भावुक अपील की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनएचएम के निदेशक शशि प्रकाश झा रहे, जबकि सेमिनार में एनएचएम की अनिमा किस्कु और स्कूल की प्राचार्या सिस्टर ग्रेस भी मौजूद रहीं।

'उम्र या ब्लड ग्रुप की कोई बाध्यता नहीं', डॉ. भारती कश्यप ने दूर कीं भ्रांतियां
सेमिनार को संबोधित करते हुए देश की विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती कश्यप और कॉर्निया प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. निधि गडकर कश्यप ने छात्राओं को नेत्रदान के वैज्ञानिक और मानवीय पहलुओं से अवगत कराया। डॉ. भारती कश्यप ने कहा कि आज भी समाज में नेत्रदान को लेकर कई अंधविश्वास और भ्रांतियां फैली हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेत्रदान के लिए उम्र, लिंग या ब्लड ग्रुप की कोई सीमा नहीं होती। यहाँ तक कि जिन लोगों ने मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की सर्जरी करा रखी है, वे भी मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि नेत्रदान की समूची प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क और गरिमापूर्ण तरीके से केवल 15 से 20 मिनट के भीतर पूरी हो जाती है, जिससे अंतिम संस्कार की विधि में किसी भी प्रकार का विलंब नहीं होता। जरूरत पड़ने पर आई बैंक की प्रशिक्षित मेडिकल टीम मृतक के घर जाकर भी यह प्रक्रिया सम्मानपूर्वक पूरी करती है।

एक नेत्रदान से दो कॉर्नियल दृष्टिहीनों को मिलेगी नई जिंदगी
कॉर्निया प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. निधि गडकर कश्यप ने बताया कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में 500 से अधिक सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। ये सभी सर्जरी आधुनिकतम DSEK और DMEK तकनीकों के जरिए की गई हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा किए गए नेत्रदान से दो कॉर्नियल दृष्टिहीन लोगों के जीवन का अंधेरा दूर कर उन्हें नई रोशनी दी जा सकती है।

अस्पतालों में होगी काउंसलर्स की तैनाती, बनेगा डेडिकेटेड हेल्पलाइन नेटवर्क
NHM निदेशक शशि प्रकाश झा ने सेमिनार में घोषणा की कि झारखंड में नेत्रदान की दर को बढ़ाने के लिए राज्य के प्रमुख अस्पतालों में विशेष काउंसलर्स की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, मृत्यु के 4 से 6 घंटे के गोल्डन पीरियड के भीतर कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त करने के लिए एक त्वरित हेल्पलाइन नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में इस नेक पहल को प्रोत्साहित करने के लिए नेत्रदान करने वाले दाताओं के परिवारों को सार्वजनिक मंचों पर सम्मानित करने की मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी।
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