गिरिडीह में नक्सली दंपति ने किया आत्मसमर्पण, 15 मामलों में थे वांछित
बुधवार को में जिले के पीरटांड और खुखरा इलाके से ताल्लुक रखने वाले एक नक्सली पति-पत्नी ने पुलिस और प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया.

गिरिडीह : जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे लगातार अभियानों का असर अब साफ दिखने लगा है. बुधवार को इसी कड़ी में जिले के पीरटांड और खुखरा इलाके से ताल्लुक रखने वाले एक नक्सली पति-पत्नी ने पुलिस और प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया. आत्मसमर्पण करने वाले दंपति में शिवलाल हेमब्रम उर्फ शिवा और उसकी पत्नी सरिता हासदा उर्फ उर्मिला शामिल हैं. दोनों लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़े थे और कई नक्सली घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे.
कुख्यात नक्सली 'विवेक दा' के दस्ते से था संबंध
शिवलाल हेमब्रम भाकपा माओवादी की एरिया कमेटी का सदस्य था और पीरटांड के मधुबन थाना क्षेत्र के तेसाफूली गांव का निवासी है. उसकी पत्नी सरिता हासदा भी खुखरा थाना क्षेत्र के चतरो गांव की रहने वाली है और कुख्यात नक्सली 'विवेक दा' के दस्ते की सदस्य रही है. पुलिस के अनुसार, शिवलाल पर कुल 11 और सरिता पर 4 नक्सली घटनाओं से जुड़े केस दर्ज हैं. ये मामले हत्या, पुलिस पर हमले, विस्फोट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े हैं.
"दिशा – एक नई पहल" के तहत दिए गए 50-50 हजार रुपये
दोनों नक्सलियों ने बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया. गिरिडीह के न्यू पुलिस लाइन में हुए आत्मसमर्पण समारोह के दौरान उन्हें झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति "दिशा – एक नई पहल" के तहत 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई. कार्यक्रम में उपायुक्त रामनिवास यादव, सीआरपीएफ के डीआईजी अमित सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार, एएसपी सुरजीत कुमार, डुमरी एसडीपीओ सुमित प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
अधिकारियों ने दोनों नक्सलियों का बुके और शॉल देकर स्वागत किया. डीसी रामनिवास यादव ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हिंसा का कोई स्थान नहीं है. जो नक्सली मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पुनर्वास की हर सुविधा दे रही है. उन्होंने यह भी कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों को सरकार रोजगार, शिक्षा और जीवन यापन की पूरी सहायता देती है.
डीआईजी ने दिया नक्सलियों को सख्त संदेश
सीआरपीएफ डीआईजी अमित सिंह ने नक्सलियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर है. उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर को नक्सलियों द्वारा घोषित बंद का कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नक्सली अब "टिमटिमाता तारा" बनकर रह गए हैं, जिनकी रौशनी बहुत जल्द पूरी तरह बुझ जाएगी.
सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत अब तक झारखंड में सैकड़ों नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं. यह नीति न केवल आर्थिक सहायता देती है, बल्कि समाज की मुख्यधारा में लौटने का भी मौका देती है. शिवलाल और सरिता का यह कदम निश्चित रूप से अन्य भटके युवाओं को भी प्रेरणा देगा.
यह आत्मसमर्पण सिर्फ दो लोगों की वापसी नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज और शांतिपूर्ण झारखंड की ओर बढ़ता हुआ कदम है.
(रिपोर्ट : मनोज कुमार पिंटू)
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