Jharkhand (Chatra): चतरा सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ. इलाज के दौरान मां और बच्चे की मौत से भड़के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर बवाल काटा है. परिजनों के अनुसार प्रसव के लिए एडमिट महिला और पेट में पल रहे बच्चे की मौत ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों व नर्स द्वारा गलत इंजेक्शन देने से हुई है.
हालांकि परिजनों के आरोपों को अस्पताल प्रबंधन ने पूरी तरह से नकार दिया है. चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में एडमिट होने से पहले ही महिला की स्थिति गंभीर हो गई थी. जैसे ही ड्यूटी पर तैनात नर्स ने इंजेक्शन के लिए कैन्डुला लगाया उसकी मौत हो गई. मृतिका की पहचान कान्हाचट्टी प्रखंड के चारु गांव निवासी यासमीन प्रवीण के रूप में हुई है. परिजन ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों पर भ्रष्टाचार व लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
परिजनों के अनुसार कान्हाचट्टी प्रखंड के चारु गांव निवासी मोकीम अंसारी की पत्नी यासमीन परवीन (22 वर्ष) को प्रसव पीड़ा के बाद डिलीवरी के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मृतिका के परिजनों ने बताया कि दोपहर 12 बजे प्रसव पीड़ा के बाद यासमीन को डिलीवरी के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों के अनुसार सदर अस्पताल में भर्ती होने के एक घंटे बाद भी न तो कोई डॉक्टर उसे देखने आया और न ही नर्स ने ही इलाज की जहमत उठाई. ऐसे में यासमीन की स्थिति बिगड़ गई.
इसके बाद परिजनों के हो हल्ला करने के बाद ड्यूटी पर तैनात नर्स उसे देखने पहुंची और इंजेक्शन दे दिया. इंजेक्शन लगते ही यासमीन की मौत हो गई और बाद में पेट में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई. इस पूरे मामले में मृतिका के परिजनों ने सदर अस्पताल के महिला वार्ड में तैनात नर्स और डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है. परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है.
उक्त मामले में सदर अस्पताल और प्रबंधन से जुड़े कोई भी अधिकारी कैमरे में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं. हालांकि सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जब महिला अस्पताल पहुंची तब उसकी स्थिति गंभीर हो चुकी थी. वहीं पुलिस ने भी मामले में जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है.








