8 वर्ष पुराने झूठे मुकदमे में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह हुईं बरी, बोलीं — “सत्य को दबाया जा सकता है, पर हराया नहीं जा सकता”
आठ वर्ष पुराने एक कथित झूठे मुकदमे में आज न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह समेत सभी आरोपियों को निर्दोष करार दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा.

रांची : आठ वर्ष पुराने एक कथित झूठे मुकदमे में आज न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह समेत सभी आरोपियों को निर्दोष करार दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा. यह मामला उस समय के भाजपा विधायक अशोक भगत द्वारा दायर किया गया था, जिसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया जा रहा है.
मामले में 80 वर्ष के एक बुजुर्ग और कई युवाओं को भी अभियुक्त बनाया गया था. आठ वर्षों तक चले इस मुकदमे में आरोपियों को सामाजिक और मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा. अदालत के फैसले ने अब उन सभी निर्दोष लोगों को राहत दी है जिन्हें बिना सबूत के झूठे आरोपों में फँसाया गया था.
फैसले के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने न्यायालय और न्याय व्यवस्था के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “सत्य को दबाया जा सकता है, परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता. न्यायालय ने सत्य को पहचानते हुए हमें न्याय दिया है. यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस निर्दोष की जीत है जिसे राजनीतिक कारणों से परेशान किया गया.”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा. साथ ही, यह भी संकेत देता है कि राजनीति में विरोधियों को झूठे मामलों में फँसाने की प्रवृत्ति का अंत होना चाहिए. अदालत का यह निर्णय न केवल दीपिका पांडेय सिंह के लिए राहत भरा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्य और न्याय के आगे कोई भी राजनीतिक साज़िश अधिक दिनों तक टिक नहीं सकती.
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