Makar Sankranti 2026 : झारखंड ही नहीं बिहार व बंगाल में भी मशहूर है झरिया का तिलकुट, गया से बुलाए जाते हैं कारीगर
देश के हर हिस्से में अलग-अलग नामों से मनाया जाने वाला त्योहार "मकर संक्रांति", जिसके नाम भले अलग हों महत्व हर जगह एक जैसी है. इस दिन खाए जाने वाले तिलकुट की डिमांड इन दिनों बढ़ जाती है. अगर झारखंड, बिहार और आसपास के राज्यों की बात की जाए तो झरिया में बनने वाला तिलकुट काफी चर्चा में रहता है.

JHARKHAND (JHARIA): हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार मकर संक्रांति में अभी कुछ दिन शेष है. लेकिन बाजार तिलकुट की सौंधी महक से गुलजार है. दुकानों में कारीगर पूरे दिन तिलकुट और तिल के लड्डू तैयार करने में जुटे हैं. मकर संक्रांति के दिन माल कम न पड़ जाए, इसलिए पर्याप्त स्टॉक तैयार किया जा रहा है. लोगों ने खरीदारी भी शुरू कर दी है. तिलकुट की सौंधी महक वातावरण में मिठास घोल रही है.

ठंड के मौसम में बढ़ जाती है मांग
धनबाद जिले के झरिया का तिलकुट सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी प्रसिद्ध है. वैसे तो यहां के बाजारों में साल भर तिलकुट की ब्रिकी होती है, लेकिन ठंड के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है. इन दिनों झरिया बाजार और आस-पास के घरों में धम-धम की आवाज गूंजने लगती है. यह किसी फैक्ट्री या मशीनों की आवाज नहीं बल्कि हाथ से तिलकुट कूटने की आवाज होती है.

झारखंड समेत बिहार और बंगाल के प्रमुख शहरों में सप्लाई
झरिया शहर का मुख्य बाजार, गांधी रोड, गोलघर गली व मेन रोड में तिलकुट की दुकानें सज गई हैं. लोग अभी से ही तिलकुट की खरीदारी करने लगे हैं. वैसे तो झरिया शहर में तिलकुट कई जगहों पर बनाया जाता है, लेकिन दुर्गा ब्रांड तिलकुट यहां खासा पसंद किया जाता है. यहां तैयार तिलकुट की झारखंड समेत बिहार और बंगाल के प्रमुख शहरों में सप्लाई होती है. दुर्गा ब्रांड तिलकुट के कारोबारी रंजीत गुप्ता बताते हैं कि वह पिछले 55 वर्षों से तिलकुट बनाने का काम कर रहे हैं. माल तैयार करने का काम नवंबर से शुरू हो जाता है.

बिहार के गया से बुलाए जाते हैं कारीगर
रंजीत गुप्ता ने बताया कि मकर संक्रांति को देखते हुए माल तैयार करने के लिए वह हर साल बिहार के गया से कारीगरों को बुलाते हैं. इस बार 20 से 25 कारीगर सुबह से रात तक रोजाना करीब 10 घंटे तिलकुट बनाने के काम में लगे हुए हैं. प्रतिदिन 250 से 300 किलो तिलकुट तैयार हो रहा है. व्यापारियों द्वारा चीनी, गुड़, ड्राई फ्रूट्स व खोवा समेत अन्य तरह के तिलकुट की डिमांड की जाती है.

शुगर फ्री व गुड़ से बने तिलकुट की ज्यादा डिमांड
इस बार शुगर फ्री तिलकुट व गुड़ से बने तिलकुट की ज्यादा डिमांड है. खोवा, सफेद तिल व गुड़ के तिलकुट व गजक ज्यादा पसंद किये जा रहे हैं. शुगर फ्री तिलकुट की खासियत यह है कि इसे चीनी की अपेक्षा तिल को ज्यादा मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है. ये शुगर फ्री तिलकुट झरिया के बाजार में पहली बार आया है. हालांकि, इससे पहले खोए वाला नॉर्मल तिलकुट बिक रहा था.

जहानाबाद से आए कुशल कारीगर तैयार कर रहे तिलकुट
व्यवसायी सुरेश गुप्ता बताते हैं कि वे पिछले 70 वर्षों से तिलकुट बनाने का कार्य रहे हैं. इस दुकान की खासियत यह है कि यहां बिहार के जहानाबाद से आए कुशल कारीगरों द्वारा तिलकुट तैयार किया जा रहा है. मकर संक्रांति को देखते हुए जहानाबाद से अनुभवी कारीगरों को बुलाया गया है, जो पूरी शुद्धता और पारंपरिक तरीके से तिलकुट तैयार कर रहे हैं. जहानाबाद का तिलकुट लोगों को खूब पसंद आ रहा है. बिहार, झारखंड और अन्य क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है.
तिलकुट खाने का है धार्मिक महत्व, स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद
तिलकुट को मकर संक्रांति का प्रमुख मिष्ठान माना गया है. इस दिन तिलकुट खाने का धार्मिक महत्व है. यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. तिलकुट खाने से शरीर को गर्माहट मिलती है, ऊर्जा मिलती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, पाचन सुधरता है, कब्ज की शिकायत दूर होती है, इम्यूनिटी बढ़ती है, त्वचा और बालों को पोषण मिलता है. क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो खासकर सर्दियों के लिए फायदेमंद हैं.
रिपोर्ट : अभिमन्यु कुमार









