दो साल के मासूम को मरता छोड़ गए माता-पिता, शरीर से बाहर निकल आई थी आंत, नक्षत्र न्यूज की पहल से बची जान
बिहार के लखीसराय में एक माता-पिता ने मासूम बच्चे को इलाज कराने की बजाए उसका अंतिम संस्कार करना ज्यादा उचित समझा. नक्षत्र न्यूज के रिपोर्टर की सूझबूझ से बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया.

Lakhisarai/Bihar (Report By- Gopal Prasad Arya): कहते हैं न.. "जाको राखे साईयां, मार सके न कोए". इसी कथन को सत्यापित करती एक मार्मिक घटना लखीसराय से प्रकाश में आई है. घर में बच्चे का जन्म हो तो आमतौर पर परिवार खुशियां मनाता है, बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ न हो तो उसकी यथासंभव देखभाल की जाती है. लेकिन इसके विपरीत बिहार के लखीसराय जिले से एक दो साल के मासूम को फेंक देना और जला देने का भी प्रयास किया गया, यह कृत्य बच्चे के माता-पिता द्वारा ही किया गया.
बच्चे के शरीर से निकली हुई थी आंत बाहर
जानकारी के अनुसार बच्चे की आंत शरीर से बाहर निकली हुई थी. बच्चे के माता-पिता के अनुसार उन्हें लगा कि बच्चा जीवित नहीं रह पाएगा, हालत काफी नाजुक स्थिति में पहुंच गई थी. उसे उनके द्वारा नदी किनारे फेंक कर अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था. लेकिन बच्चा बच गया.
कर दिया था दाह संस्कार
घटना बीते शनिवार की है. इलाज के अभाव में बच्चे को मृत समझकर माता-पिता ने किउल नदी के पिलर संख्या 5 के समीप दाह संस्कार की व्यवस्था कर लावारिस छोड़ भाग गए. जिसे अहले सुबह आसपास के लोगों द्वारा देखा गया. मॉर्निंग वॉक कर घर जाते लोगों ने इस भयानक मंजर को देखा तो उनके होश उड़ गए.
पुलिस तक नहीं पहुंच सके प्रत्यक्षदर्शी
अपने कंटेंट को वायरल करने की मंशा देखिए कि बच्चे को अस्पताल पहुंचाना तो दूर लोगों ने उसकी फोटो-वीडियो लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना ज्यादा जरूरी समझा. खैर, बताया जाता है कि उनमें से ही किसी व्यक्ति द्वारा घटना की सूचना लखीसराय पुलिस को देने का प्रयास किया गया, जो कि सफल न हो सका. कारण यह कि पुलिस के नंबर पर किसा ने फोन रिसीव नहीं किया. जिसके बाद नक्षत्र न्यूज के सहयोगी गोपाल प्रसाद आर्या को घटना की सूचना मिली.
नक्षत्र न्यूज संवाददाता की पहल
हमारे संवाददाता ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को समझा और ग्रामीणों के सहयोग से सदर अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया. जिसके बाद इसकी जानकारी जिलाधिकारी नीरज कुमार को दी गई. बताया जाता है कि अस्पताल के चिकित्सक बच्चे को बेहतर इलाज के लिए पटना भेजना चाह रहे थे, लेकिन महिला व बाल विकास पदाधिकारी वंदना पांडे द्वारा बच्चे को आईजीएमएस ( Indira Gandhi Institute of Medical Sciences) पहुंचाया गया. जहां बच्चे की करीब चार घंटे की सर्जरी की गई, जो सफल रही.
महिला-पुरुष कर रहे बच्चे के माता-पिता होने का दावा
तीन दिन के बाद अब बच्चे की स्थिति पहले से काफी बेहतर बताई जा रही है. अब जब बच्चे की हालत में बहुत सुधार हो चुका है, तो उसके माता पिता उसे अपने साथ ले जाना चाहते हैं. महिला व बाल विकास पदाधिकारी वंदना पांडे ने बताया कि बच्चे के माता-पिता गुमशुदा कार्यालय पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि उनसे जांच-पड़ताल की जाएगी. सारी पुष्टि होने के बाद ही बच्चे को उन्हें सौंपा जाएगा. बताते चलें कि बच्चे के माता-पिता होने का दावा करने वाले महिला-पुरुष खुद को जमुई के अम्बा अवगील के रहने वाले बता रहे हैं. युवक ने अपना नाम शिव प्रसाद साव बताया है.
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