JPSC-JSSC : पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID रिमांड के बाद भेजा गया जेल, अदालत में हुई पेशी
14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा प्रकरण में जांच का दायरा लगातार गहराता जा रहा है।


JPSC-JSSC Scam: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा प्रकरण में जांच का दायरा लगातार गहराता जा रहा है। मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (जेल) भेज दिया गया है। राज्य की सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्था के शीर्ष पद पर रहे पूर्व अधिकारी के जेल जाने से प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
10 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी, रिमांड के बाद कोर्ट में पेशी
CID ने JPSC की भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता और धांधली के पुख्ता सबूत मिलने के बाद 10 अगस्त को पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया था। इस पूरे प्रकरण में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने विस्तृत पूछताछ और साक्ष्य संकलन के लिए उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया था। रिमांड अवधि पूरी होने के उपरांत सोमवार दोपहर करीब 3:30 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें अदालत में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें जेल भेजने का आदेश जारी हुआ।
2 करोड़ रुपये और 20 फीसदी कमीशन पर दागी एजेंसी को दिया काम
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों के अनुसार, परीक्षा संचालन का कार्य निजी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) को सौंपने के एवज में दो करोड़ रुपये एकमुश्त और कुल भुगतान का 20 प्रतिशत कमीशन तय करने की अवैध डील का खुलासा हुआ था। आरोप है कि एल. खियांग्ते ने बिना किसी खुली निविदा (टेंडर) के केवल नॉमिनेशन के आधार पर TDPL को परीक्षा संचालन का संवेदनशील जिम्मा सौंप दिया। इतना ही नहीं, जिस एजेंसी को JPSC ने पूर्व में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड किया हुआ था, उसी एजेंसी से लगातार परीक्षाएं कराई जाती रहीं और कंपनी की कोई पृष्ठभूमि जांच भी नहीं की गई।
यूपी में जेल जा चुके थे एजेंसी निदेशक, फिर भी की गई डील
जांच एजेंसी की पड़ताल में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि परीक्षा संचालन करने वाली TDPL कंपनी के दोनों निदेशक उत्तर प्रदेश में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के मामले में पहले ही जेल की सजा काट चुके थे। इसके बावजूद पूर्व अध्यक्ष ने कंपनी के प्रतिनिधियों व बिचौलियों के साथ मिलकर गोपनीय परीक्षा कार्य सौंपने का सौदा किया। जुलाई माह से शुरू हुई CID की इस सघन कार्रवाई के तहत अब तक करीब दो दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। परीक्षा की शुचिता को लेकर छात्रों का आंदोलन भी लगातार जारी है और जांच एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है।

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