JHARKHAND(DUMKA): झारखंड की उपराजधानी दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा का 47वां स्थापना दिवस मनाया गया. गांधी मैदान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में संथाल परगना समेत अलग-अलग जिलों से पहुंचे जेएमएम कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी. इस दौरान कार्यकर्ताओं में जोश के साथ गुरुजी के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी साफ नजर आया.
गुरुजी को याद करते हुए भावुक हो गए हेमंत सोरेन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थापना दिवस कार्यक्रम के मंच पर एक खास दृश्य देखने को मिला. मंच की मुख्य कुर्सी खाली रखी गई और उस पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर रखी गई. यह सिर्फ पार्टी में उनके स्थान को ही नहीं. उनके प्रति सम्मान और उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन भी था. पूरे कार्यक्रम के दौरान मंच और मैदान दोनों जगहों पर गुरुजी की गैरमौजूदगी महसूस की गई. खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुजी को याद करते हुए भावुक हो गए. और उनके आंखों में आंसू आ आए, जिससे माहौल और भी भावनात्मक हो गया. इस मौके पर सीएम ने झामुमो के संघर्ष और आंदोलन के इतिहास को याद किया और झारखंड के हक की लड़ाई को जारी रखने का संदेश दिया.
आचार संहिता के कारण रात 10 बजे तक सम्पन्न हो गया कार्यक्रम
आमतौर पर झामुमो का समारोह रात के लगभग आठ बजे से शुरू होकर देर रात तक चलता है. दरअसल, 2 फरवरी 1978 को दुमका में पार्टी का पहला स्थापना दिवस समारोह मनाया गया था. उस दौर में गुरुजी का संबोधन रात में होता था. जिसे सुनने के लिए लोग देर रात तक डटे रहते थे. लेकिन इस बार आदर्श आचार संहिता के कारण ये कार्यक्रम रात 10 बजे तक सम्पन्न हो गया. कार्यक्रम में पहुंचे जेएमएम के तमाम नेताओं ने गुरूजी को नमन करते हुए झारखंड को आगे ले जाने का संकल्प दोहराया.
आंदोलन और संवाद का सिलसिला आज भी कायम
अलग राज्य बनने के बाद भी जेएमएम ने झारखंडियों की हक के लिए आवाज बुलंद करना जारी रखा और चाहे सत्ता में रहे या विपक्ष की भूमिका में, जनमुद्दों और जन अपेक्षाओं को लेकर आंदोलन और संवाद का सिलसिला आज भी कायम है. यही इस पार्टी को दूसरे राजनीतिक दलों से अलग बनाती है.
रिपोर्ट : विजय तिवारी









