थैलेसिमिया पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण के बाद सख्त हुई सरकार, सभी ब्लड बैंकों में एलाइज़ा टेस्ट अनिवार्य
चाईबासा में थैलेसिमिया पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण के बाद झारखंड सरकार ने सभी ब्लड बैंकों में एलिसा टेस्ट अनिवार्य किया है. जांच समिति ने पाया कि पांच जिलों में एलिसा मशीनें कार्यरत नहीं हैं. स्वास्थ्य विभाग ने रैपिड टेस्ट बंद कर केवल एलिसा जांच से रक्त परीक्षण के निर्देश दिए हैं.

Naxatra News
चाईबासा, झारखंड : चाईबासा में थैलेसिमिया से पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने राज्यभर में रक्त जांच व्यवस्था को और सख्त करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इस गंभीर लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी ब्लड बैंकों को निर्देश दिया है कि अब बिना ELISA (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) मशीन के खून न लिया जाए.
राज्य सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा के नेतृत्व में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. समिति ने जांच के दौरान पाया कि झारखंड के पांच जिलों में एलिसा मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद अब तक कार्यरत नहीं हैं. इन जिलों में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का जिला जामताड़ा भी शामिल है.
डॉ. नेहा अरोड़ा ने जानकारी दी कि राज्य के सभी जिलों में एलिसा मशीनों की खरीदारी पूरी हो चुकी है, लेकिन पांच जिलों में यह मशीनें अब तक चालू नहीं की गई हैं. उन्होंने बताया कि चाईबासा सदर अस्पताल में सितंबर महीने से ही एलिसा मशीन का उपयोग शुरू कर दिया गया है. साथ ही सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि अब रैपिड टेस्ट किट का प्रयोग पूरी तरह बंद किया जाए और रक्त जांच केवल एलिसा मशीन से ही की जाए.
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी ब्लड बैंक में बिना एलिसा टेस्ट के रक्त न लिया जाए. उन्होंने बताया कि सभी जिलों के सिविल सर्जनों और ब्लड बैंक अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं.
हालांकि, इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह चिंता का विषय है कि जिन जिलों में एलिसा मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी थीं, वहां अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन मशीनों को समय रहते चालू किया गया होता, तो ऐसी गंभीर घटना से बचा जा सकता था. अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि इन पांच जिलों में जल्द से जल्द एलिसा जांच शुरू करवाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से निर्दोष मरीजों की जान खतरे में न पड़े.
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