झारखंड विधानसभा मानसून सत्र : 8,399 करोड़ का पहला अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित, केंद्र पर लगा भेदभाव का आरोप
झारखंड विधानसभा में 2026-27 का 8,399 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट पारित हुआ। वित्त मंत्री ने केंद्र पर झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत बताई।

झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को राज्य सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन ने कुल 8,399 करोड़ 31 लाख 11 हजार रुपये की अनुदान मांगों को अपनी मंजूरी दी। इसके साथ ही 'झारखंड विनियोग संख्या-3 विधेयक, 2026' भी सदन से पास हो गया। इस विनियोग विधेयक के जरिए 31 मार्च, 2027 तक विभिन्न विभागों और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के लिए राशि का कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। चर्चा के बाद सदन ने इसके सभी प्रावधानों को अंतिम रूप से स्वीकृति दे दी।
विभिन्न विभागों को मिला बजट का बड़ा हिस्सा
ग्रामीण विकास विभाग: सबसे अधिक 4,258 करोड़ 67 लाख 35 हजार रुपये।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग: 946 करोड़ 3 लाख 95 हजार रुपये (अन्य मद में 25.05 करोड़ अलग से)।
ग्रामीण कार्य विभाग: 885 करोड़ 83 लाख रुपये।
गृह कार्य एवं आपदा प्रबंधन विभाग: आपदा प्रबंधन के लिए 490.06 करोड़ और गृह प्रभाग के लिए 144.16 करोड़ रुपये।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग: 271 करोड़ 61 लाख रुपये।
पंचायती राज विभाग: 244 करोड़ 80 लाख रुपये।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: 218 करोड़ 16 लाख रुपये।
खान एवं भूतत्व विभाग: 173 करोड़ 65 लाख रुपये और कल्याण विभाग को 91.24 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इनके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, नगर विकास और वन एवं पर्यावरण समेत अन्य विभागों की मांगों को भी सदन ने मंजूरी दी। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप
सदन में अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति और केंद्र से मिलने वाली राशि का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होने के कारण केंद्र झारखंड के साथ लगातार भेदभाव कर रहा है।
टैक्स डेवोल्यूशन (कर हिस्सेदारी) के आंकड़े रखते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को 19,208 करोड़, बिहार को 10,845 करोड़, मध्य प्रदेश को 810 करोड़, महाराष्ट्र को 722 करोड़ और राजस्थान को 460 करोड़ रुपये मिले, जबकि झारखंड के हिस्से में केवल 360 करोड़ रुपये आए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के बाद झारखंड को अनुदान के रूप में महज 0.73 प्रतिशत राशि ही मिल पाई है।
वित्तीय प्रबंधन की सराहना और मजबूत स्थिति का दावा
विपक्ष के हमलों के बीच सरकार ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया। वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में राज्य की राजस्व प्राप्ति लगभग 25 से 26 प्रतिशत रही है, जबकि राजस्व व्यय करीब 21 प्रतिशत दर्ज किया गया है। उन्होंने गर्व से कहा कि नीति आयोग ने भी झारखंड के उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन की प्रशंसा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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