नदी में शव मिलने के मामले में नया मोड़!, तैराक थे जाकिर अली, साथियों ने कहा- डूबकर आत्महत्या करना असंभव, हो खुलासे की जांच
पूर्व छात्र नेता जाकिर अली की नदी में संदिग्ध मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। साथियों का दावा है कि वह कुशल तैराक थे और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

झारखंड की राजधानी रांची और आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में घटी एक दुखद घटना को लेकर राजनीति और छात्रों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। मानगो (पुरुलिया रोड) निवासी एवं पूर्व छात्र नेता ज़ाकिर अली की हाल ही में हुई रहस्यमयी मौत के मामले में कई ऐसे नए और गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। छात्र नेता हेमंत पाठक ने इस मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
नदी में शव मिलने और आत्महत्या के दावे पर संशय
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पूर्व मानगो क्षेत्र के लक्ष्मण नगर के समीप एक व्यक्ति के नदी में डूबने या मृत शरीर मिलने की सूचना सामने आई थी। बताया गया कि शव पानी के तेज बहाव में बहकर मोहरदा क्षेत्र की ओर चला गया और अंततः बिरसानगर थाना क्षेत्र से बरामद हुआ। वर्तमान में आज़ादनगर थाना पुलिस इस मामले को प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर चल रही है।
हालांकि, इस थ्योरी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए छात्र नेता हेमंत पाठक ने बताया कि वे वर्ष 2009 से ज़ाकिर अली और उनके परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। जाकिर अली एक उत्कृष्ट और कुशल तैराक थे। छुट्टियों के दौरान डिमना लेक में एक ही सांस में काफी लंबी दूरी तक तैरने की उनकी क्षमता से उनके करीबी भली-भांति परिचित हैं। ऐसी स्थिति में पानी में डूबकर उनके द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात गले नहीं उतरती और यह कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
सच्चाई सामने लाने के लिए उच्चस्तरीय जांच की दरकार
परिजनों और शुभचिंतकों का मानना है कि ज़ाकिर अली जैसे कुशल तैराक का नदी में इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया जाना साधारण घटना नहीं है। इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए मामले की गहन, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह हादसा था, आत्महत्या या फिर कोई साजिश।
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