झारखंड : 25 वर्षों की यात्रा - विकास की उपलब्धियां और दर्दनाक घटनाएं
15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर बना झारखंड आज अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर चुका है. इन दो दशकों में राज्य ने औद्यौगिक विकास, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति की, पर साथ ही कई सामाजिक, राजनीतिक और प्राकृतिक त्रासदियां भी झेलीं.

Jharkhand Foundation Day 2025:
राज्य का गठन और शुरुआती चुनौतियां
15 नवंबर 2000 को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन ही झारखंड को बिहार से अलग कर देश के 28वें राज्य के रूप में मान्यता दी गई. शुरुआती वर्षों में प्रशासनिक ढांचें, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी. राज्य गठन के बाद राजनीतिक अस्थिरता ने विकास को प्रभावित किया. पहले दस वर्षों में राज्य में कई बार मुख्यमंत्री बदले गए.
औद्यौगिक विकास और रोजगार सृजन
झारखंड को प्रकृति ने खनिज संपदा से समृद्ध बनाया है. टाटा स्टील, भेल, सीसीएल, एनटीपीसी और एनएमडीसी जैसी कंपनियों ने यहां औद्यौगिक निवेश को बढ़ावा दिया. बोकारो, धनबाद, रामगढ़ और चास जैसे क्षेत्र औद्यौगिक हब बने. हाल के वर्षों में हेमंत सरकार ने "झारखंड इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2021" के तहत विदेशी निवेश और MSME को प्रोत्साहन दिया.
बुनियादी ढांचे में सुधार
झारखंड निर्माण से लेकर अब तक राज्य के परिवहन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और देवघर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में नए एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है. देवघर एयरपोर्ट 2022 में शुरु हुआ, जिससे धार्मिक पर्यटन को कापी बढ़ावा मिला. जहां ग्रामीण इलाकों में सड़कों की भारी कमी थी, वहीं वर्तमान झारखंड के अत्यधिक गांवों में सड़कों का निर्माण हो चुका है.
शिक्षा और खेल में पहचान
एनआईटी जमशेदपुर, आईआईएम रांची, और सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों ने राज्य को शिक्षा का केंद्र बनाया. खेल के क्षेत्र में झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया - महेंद्र सिंह धोनी, दीपिका कुमारी, सलीमा टेटे जैसे खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया. राज्य सरकार ने "खेलो झारखंड" मिशन शुरू किया जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच मिला.
सामाजिक योजनाओं से लाभ
पिछले 25 वर्षों में जनता की भलाई के लिए कई योजनाएं भी शुरु की गई हैं, जैसे - मुख्यमंत्री सुकन्या योजना, सार्वभौमिक पेंशन योजना आदि. वहीं जोहार प्रोजेक्ट ने महिलाओं, किसानों और गरीब वर्गों को सशक्त किया.
दर्दनाक घटनाएं और चुनौतियां
झारखंड ने बीते 25 वर्षों में कई दर्दनाक घटनाओं का दंश भी झेला है. जिसमें 2001 में हुए बोकारो ब्लास्ट, 2010 में हुई नक्सली हिंसा, 2021 की धनबाद खदान में हुई दुर्घटना ने जानमाल का नुकसान किया ही. साथ ही कठिन दौर से लड़ने को भी मजबूर कर दिया. कोरोना महामारी के दौरान राज्य के हजारों प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और रोजगार संकट ने भी गहरी चोट दी. कई बार हुए पुल हादसों ने राज्य के बुनियादी ढांचे की कमजोरी को उजागर किया है.
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