नीरज चोपड़ा की तरह कायम करना चाहता हूं मिसाल, 22 मीटर का आंकड़ा पार करने के बड़े लक्ष्य पर बोले तजिंदरपाल सिंह तूर
भारतीय शॉट पुट स्टार तजिंदरपाल सिंह तूर 22 मीटर का आंकड़ा पार कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के लक्ष्य पर हैं। नीरज चोपड़ा से प्रेरित तूर भारतीय शॉट पुट में ऐसा मानक स्थापित करना चाहते हैं, जिससे युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिले।

Tajinderpal Singh Toor : भारत के सबसे सफल गोला फेंक (शॉट पुट) एथलीट और राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक तजिंदरपाल सिंह तूर अब 22 मीटर के बहुप्रतीक्षित आंकड़े को पार करने का सपना देख रहे हैं। 31 वर्षीय तूर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 21.77 मीटर रहा है। वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसा मानक तय हो, जिससे 20 और 21 मीटर का थ्रो बहुत सामान्य लगने लगे।
तूर ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य 22 मीटर गोला फेंककर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना है। वे चाहते हैं कि भारत के युवा खिलाड़ी यह सोचें कि 21 मीटर पार करना कोई बड़ी बात नहीं है।
नीरज चोपड़ा के 90 मीटर थ्रो से मिला नया हौसला
तूर ने भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) स्टार नीरज चोपड़ा की मिसाल देते हुए कहा कि जिस तरह नीरज के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और उनके 90.23 मीटर के रिकॉर्ड ने मानक ऊंचा किया, उससे देश के बाकी खिलाड़ियों का मनोबल काफी बढ़ा है।
नीरज के इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद रोहित यादव (87.68 मीटर), किशोर जेना (87.54 मीटर), सचिन यादव (86.54 मीटर) और यशवीर सिंह (85.41 मीटर) जैसे युवाओं ने 85 मीटर से अधिक थ्रो करके दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। तूर का मानना है कि ऐसा ही माहौल अब शॉट पुट में भी बनाने की जरूरत है।
'चोटों ने बार-बार रोका रास्ता, वरना प्रदर्शन होता और बेहतर'
अपनी करियर की असफलताओं पर बात करते हुए तूर ने कहा कि चोटों ने हमेशा उनका पीछा किया है। उन्होंने साफ कहा कि जब कोई खिलाड़ी पूरी तरह फिट ही न हो, तो उससे बाहर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद करना सही नहीं है।
हाल ही में हुए ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों का जिक्र करते हुए तूर ने बताया कि प्रतियोगिता से महज 12 दिन पहले उनकी पिंडली की मांसपेशियों में ग्रेड 1 की चोट लग गई थी।
चोट के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों में हासिल किया पांचवां स्थान
तूर ने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों में चोट के कारण वे अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो नहीं दे पाए, फिर भी खराब मौसम और तेज हवाओं के बावजूद उन्होंने 20.27 मीटर का थ्रो किया और पांचवें स्थान पर रहे।
भारत लौटने के बाद जब उनका MRI हुआ, तब जाकर ग्रेड 1 इंजरी का सही पता चला। उनका कहना है कि अगर उन्हें पहले ही चोट की गंभीरता पता चल जाती, तो इसका असर उनके दिमाग पर पड़ सकता था। फिलहाल तूर अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रहे हैं और 22 मीटर के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने के लिए जी-तोड़ मेहनत में जुटे हैं।
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